
जिला पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष कुमार (IPS) एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्मुकेश कुमार सांखला के कुशल निर्देशन में आज जिला मुख्यालय पर ‘अपराध गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नव वर्ष 2026 में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना, लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण करना और आगामी चुनावों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना रहा।
वर्ष 2025 की उपलब्धियां: शराब और मादक पदार्थों पर बड़ी चोट
बैठक के दौरान पिछले वर्ष की उपलब्धियों का विवरण साझा किया गया। जिला पुलिस ने वर्ष 2025 में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 11 करोड़ रुपये की अवैध शराब जब्त की और तस्करी में प्रयुक्त 85 छोटे-बड़े वाहन सीज किए। इसके साथ ही, एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 04 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ बरामद किए गए, जो पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है।
साइबर अपराध: ‘ऑपरेशन साइबर हंट’ का दिखा असर
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जिला पुलिस ने सराहनीय प्रगति की है। एसपी मनीष कुमार ने बताया कि वर्ष 2024 में साइबर अपराधों में रिकवरी दर 28.03% थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 40.49% हो गई है। जिले में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर हंट’ के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पूर्व में जहां जिला स्तर पर 400 से अधिक साइबर शिकायतें लंबित रहती थीं, वे अब घटकर मात्र 10 से 15 रह गई हैं। यह जिला पुलिस की साइबर अपराधियों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण है।
लंबित प्रकरणों और नए कानून पर मंथन
गोष्ठी में पोक्सो (POCSO) एक्ट, 60 एवं 90 दिनों से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निस्तारण पर विस्तृत चर्चा की गई। एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों में जांच समय पर पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया जाए। साथ ही, बैठक में लागू हुए नए कानूनों की बारीकियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया।
वर्ष 2026 की प्राथमिकताएं और चुनाव रणनीति
आगामी चुनावों और त्योहारों को देखते हुए एसपी ने समस्त वृत्ताधिकारियों (CO) और थानाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि:
संगठित अपराध और भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
महिला, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध अपराधों पर त्वरित एक्शन लिया जाए।
प्रत्येक सर्कल में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चिन्हित कर पाबंद किया जाए ताकि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।
अंत में, पुलिस तंत्र को अधिक संवेदनशील, तकनीक सक्षम और जनसहभागिता आधारित बनाने पर जोर दिया गया ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन में सुधार किया जा सके

