राजस्थान के डूंगरपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) के सब्र का बांध अब टूट गया है. पिछले 8 से 14 महीनों से वेतन न मिलने से आक्रोशित लगभग 280 प्रशिक्षकों ने सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपना बकाया मानदेय जल्द से जल्द दिलवाने की गुहार लगाई.
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के बीच गुजर रहा जीवन
विभिन्न राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत इन प्रशिक्षकों ने बताया कि वे प्लेसमेंट कंपनियों के माध्यम से सरकारी स्कूलों में कौशल विकास की शिक्षा दे रहे हैं. विडंबना यह है कि एक साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें एक फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई है.
लंबे समय से मानदेय न मिलने के कारण इन शिक्षकों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कई प्रशिक्षकों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि वेतन के अभाव में वे गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार का पालन-पोषण करना और बच्चों की फीस भरना भी दूभर हो गया है.
प्लेसमेंट कंपनियों की मनमानी और विभागीय अनदेखी
प्रशिक्षकों का सीधा आरोप है कि संबंधित प्लेसमेंट कंपनियां और विभाग उनकी समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं. शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार कंपनियों के प्रतिनिधियों और विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘खोखले आश्वासन’ ही मिले. धरातल पर भुगतान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शन के दौरान नीलमल सेवक, शिल्पा डोडियार, प्रियंका प्रजापति और ममता जैन सहित भारी संख्या में उपस्थित प्रशिक्षकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि व्यावसायिक शिक्षा परियोजना के उच्चाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे.

