राजस्थान के डूंगरपुर शहर में रविवार देर शाम एक बड़ा हादसा टल गया. शहर के बीचों-बीच स्थित घाटी मोहल्ले की धनमाता पहाड़ियों पर भीषण आग भभक उठी. सूखे जंगल और झाड़ियों में लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिसकी ऊँची-ऊँची लपटें पूरे शहर से साफ दिखाई देने लगीं. पहाड़ी के नीचे घनी आबादी होने के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया.
अंधेरा होते ही भड़की आग, दमकल के लिए बनी चुनौती
रविवार शाम जैसे ही अंधेरा हुआ, पहाड़ी पर मौजूद सूखी घास और पेड़ों ने आग पकड़ ली. हवा के चलते कुछ ही मिनटों में आग पहाड़ी के एक बड़े हिस्से में फैल गई. सूचना मिलते ही नगर परिषद की फायर ब्रिगेड टीम हरकत में आई. फायर इंचार्ज धूलेश्वर परमार, प्रवीण प्रजापत और शांतिलाल अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे.
हालांकि, राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा पहाड़ी की ऊँचाई बनी. आग पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में होने के कारण दमकल की गाड़ियों का वहां तक पहुँचना असंभव था. दुर्गम रास्ता होने की वजह से फायर फाइटर्स को मोर्चा संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.
आबादी को बचाने के लिए बनाई रणनीति
पहाड़ी की तलहटी में घनी आबादी वाला क्षेत्र (घाटी मोहल्ला) स्थित है. आग को नीचे की ओर बढ़ता देख फायर ब्रिगेड की टीम ने सूझबूझ से काम लिया. दमकलकर्मियों ने सबसे पहले पहाड़ी के निचले हिस्से में पानी की बौछारें शुरू कीं ताकि आग को रिहायशी मकानों तक पहुँचने से रोका जा सके. टीम के सदस्य जान जोखिम में डालकर पहाड़ी पर चढ़े और पारंपरिक तरीकों व सीमित संसाधनों से आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे रहे.
प्रशासनिक सतर्कता
देर रात तक फायरकर्मी आग को बुझाने और उसे आबादी क्षेत्र से दूर रखने के प्रयासों में लगे रहे. गनीमत यह रही कि समय रहते टीम मौके पर पहुँच गई, जिससे किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं है. प्रशासन ने स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है.

