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डूंगरपुर: ‘दो नदी’ पुल पर जिला प्रशासन की मॉक ड्रिल; हादसे की सूचना पर 2 मिनट में दौड़ी पुलिस, कलेक्टर ने परखी मुस्तैदी

जिला प्रशासन और सिविल डिफेंस के संयुक्त तत्वावधान में आज बुधवार को उदयपुर रोड स्थित ‘दो नदी’ पुल पर एक विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रियता, आपसी तालमेल और ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (त्वरित प्रतिक्रिया समय) का बारीकी से परीक्षण करना था.

हादसे की डमी सूचना से मची हलचल
मॉक ड्रिल के तहत एक कृत्रिम संकट (सीन) क्रिएट किया गया। सूचना प्रसारित की गई कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित संकरे ‘दो नदी’ पुल पर एक जीप ने बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मार दी है, जिसमें दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई है. सड़क हादसे की इस गंभीर सूचना के मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई और संबंधित विभागों के अधिकारी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े.

रिकॉर्ड समय में पहुंची पुलिस, कलेक्टर ने संभाली कमान
हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस ने जबरदस्त मुस्तैदी दिखाई और महज 2 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई. कुछ ही देर में जिला पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे. इसके तुरंत बाद जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर कमान संभाली. उन्होंने राहत कार्यों के तालमेल, घायलों के रेस्क्यू की डमी प्रक्रिया और घटनास्थल पर ट्रैफिक व्यवस्था के प्रबंधन का जायजा लिया.

रिस्पॉन्स टाइम सुधारने के निर्देश
अभ्यास के दौरान पाया गया कि पुलिस और कुछ प्राथमिक विभाग तुरंत पहुंचे, वहीं अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी बारी-बारी से सूचना पाकर घटना स्थल पर जुटे. कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी वास्तविक आपदा या सड़क दुर्घटना के समय ‘रिस्पॉन्स टाइम’ न्यूनतम होना चाहिए.
कलेक्टर ने कहा, “दो नदी पुल जिला मुख्यालय का एक बेहद संकरा और संवेदनशील पॉइंट है। यहाँ दुर्घटना की स्थिति में ट्रैफिक जाम और राहत कार्यों में आने वाली चुनौतियों को समझना और उनसे निपटने के लिए विभागों का आपसी समन्वय मजबूत होना अनिवार्य है.”

सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अभ्यास
इस मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना के समय जनहानि को कम से कम किया जा सके. मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने संसाधनों और मैनपावर को हमेशा ‘अलर्ट मोड’ पर रखें. मॉक ड्रिल के समापन पर जब अधिकारियों को पता चला कि यह एक अभ्यास था, तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली.

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