राजस्थान के डूंगरपुर जिले के आसपुर थाना क्षेत्र में पैंथर के आतंक से ग्रामीण सहमे हुए हैं। रविवार को पाडला जानी गांव में एक खूंखार पैंथर ने कहर बरपाते हुए एक पशुपालक के बाड़े में घुसकर 23 मेमनों को अपना शिकार बना लिया. इस हमले में 4 अन्य मेमने गंभीर रूप से घायल हुए हैं. घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग के प्रति ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है.
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, गाडा निवासी पशुपालक रूपा गायरी रविवार सुबह अपनी करीब 230 भेड़ों को चराने के लिए पास के जंगल में ले गए थे. उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से 27 छोटे मेमनों को घर के पास बने बाड़े में ही छोड़ दिया था.
शाम को जब रूपा गायरी वापस घर लौटे, तो बाड़े का नजारा देख उनके होश उड़ गए. बाड़े में चारों तरफ मेमनों के लहूलुहान शव बिखरे पड़े थे. पैंथर ने मेमनों की गर्दन पर वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था. शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्र हुए और तुरंत पुलिस व वन विभाग को सूचना दी गई.
वन विभाग की टीम ने की पुष्टि
सूचना मिलते ही आसपुर थाना पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया, जहाँ बाड़े के आसपास पैंथर के स्पष्ट पदचिह्न (Pugmarks) पाए गए. वन अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है.
ग्रामीणों की मांग: तत्काल पिंजरा लगाए विभाग
इस घटना से रूपा गायरी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पैंथर्स की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे अब इंसानों पर भी हमले का खतरा मंडराने लगा है.
ग्रामीणों ने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:
- क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाकर पैंथर को पकड़ा जाए.
- रात के समय वन विभाग की गश्त (Patrolling) बढ़ाई जाए.
- पीडि़त पशुपालक को उचित आर्थिक सहायता तुरंत दी जाए.

