डूंगरपुर। अनुसूचित क्षेत्र (TSP) में आरक्षण और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है. शुक्रवार को ‘अनुसूचित क्षेत्र आरक्षण मोर्चा’ के बैनर तले बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पर एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई.
विवाद की मुख्य वजह: रोस्टर प्रणाली और आरक्षण
मोर्चा के प्रतिनिधियों का तर्क है कि अनुसूचित क्षेत्र (TSP) में पंचायती राज पदों के लिए आरक्षण की व्यवस्था विशेष संवैधानिक प्रावधानों के तहत तय की गई है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ समूहों द्वारा टीएसपी क्षेत्र में सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए पंचायती राज पदों पर ‘रोस्टर प्रणाली’ लागू करने की मांग की जा रही है. मोर्चा का दावा है कि ऐसी मांगें पांचवीं अनुसूची के मूल ढांचे और आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों के विपरीत हैं. प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे के साथ किसी भी प्रकार का बदलाव संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन होगा.
आंदोलन के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि:
- अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के विशेष अधिकारों की रक्षा की जाए.
- पंचायती राज संस्थाओं में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को यथावत रखा जाए.
- क्षेत्र के विकास और प्रशासन में जनजातीय हितों को प्राथमिकता दी जाए.
प्रशासनिक सतर्कता और चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल तैनात रहा. मोर्चा के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते हुए चेतावनी दी कि यदि उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ की जाती है, तो भविष्य में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है. यह मामला पिछले कुछ समय से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ अलग-अलग वर्गों के अपने-अपने तर्क हैं. फिलहाल, गेंद अब सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के पाले में है कि वे इस संवेदनशील मामले का समाधान कैसे निकालते हैं.

