Headlines

डूंगरपुर में वंदे भारत का स्वागत या सियासी अखाड़ा? सांसद राजकुमार रोत और मन्नालाल रावत के समर्थकों ने लगाए नारे

डूंगरपुर वागड़ अंचल के रेल इतिहास में रविवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ना था, लेकिन डूंगरपुर रेलवे स्टेशन पर नजारा कुछ और ही नजर आया. बहुप्रतीक्षित वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम उस समय विवादों की भेंट चढ़ गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के समर्थक आपस में भिड़ गए. विकास के उत्सव के रूप में शुरू हुआ यह सरकारी कार्यक्रम देखते ही देखते एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया.

आमने-सामने आए समर्थकों के गुट

कार्यक्रम के दौरान उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत अपने-अपने समर्थकों के भारी हुजूम के साथ स्टेशन पहुंचे थे. जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, दोनों पक्षों की ओर से शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ और केंद्र सरकार के समर्थन में नारे लगाकर इस सौगात का पूरा श्रेय मोदी सरकार को दिया. इसके जवाब में राजकुमार रोत के समर्थकों ने भी अपने नेता और ‘बाप’ पार्टी के पक्ष में गगनभेदी नारेबाजी शुरू कर दी. स्टेशन पर मचे इस भारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच वहां मौजूद आम यात्री और रेल प्रशासन असहज नजर आए.

सांसदों के बीच तीखी जुबानी जंग

ट्रेन के संचालन का श्रेय लेने की होड़ मंच पर भी साफ दिखाई दी. दोनों सांसदों ने एक-दूसरे की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए:

  • सांसद मन्नालाल रावत (उदयपुर): उन्होंने विपक्ष की नारेबाजी को विकास विरोधी करार देते हुए कहा कि यह ट्रेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प का परिणाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल विकास कार्यों में अनावश्यक राजनीति कर रहे हैं.
  • सांसद राजकुमार रोत (डूंगरपुर-बांसवाड़ा): रोत ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा के पटल पर कई बार क्षेत्र की रेल समस्याओं और वंदे भारत जैसी सुविधाओं की मांग प्रमुखता से उठाई थी, जिसके दबाव में सरकार को यह कदम उठाना पड़ा. उन्होंने मन्नालाल रावत पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा, “उनके विचार मजबूत नहीं हैं, इसलिए उनमें बौखलाहट नजर आती है. दिशा की बैठक में भी उनका व्यवहार ऐसा ही था.

विकास पर भारी पड़ी राजनीति

हालांकि वंदे भारत के आने से क्षेत्र के लोगों में खुशी है, लेकिन जिस तरह से इस कार्यक्रम का राजनीतिकरण हुआ, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के कार्यों पर श्रेय की राजनीति के बजाय जनसुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन ने मामले को शांत कराया, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच यह ‘क्रेडिट वॉर’ अब भी जारी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *