राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सरकारी छात्रावासों में बच्चों के पोषण के साथ खिलवाड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. बिछीवाड़ा ब्लॉक के बड़गामा स्थित राजकीय बालिका छात्रावास (Government Girls Hostel) की वार्डन पर छात्राओं के राशन का दुरुपयोग करने और विरोध करने पर महिला रसोइया को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगे हैं. पीड़िता ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है.
छात्राओं की दाल में ‘पानी’ का खेल
छात्रावास की रसोइया सुशीला पत्नी गोपाल परमार ने अपनी शिकायत में बताया कि वार्डन मंजू रोत उन पर छात्राओं के लिए बनने वाली दाल में अधिक पानी मिलाने का लगातार दबाव बनाती हैं. सुशीला का आरोप है कि बच्चों के हक के राशन से ही वार्डन के परिवार के सदस्य, कोच, चौकीदार और वार्ड बॉय सहित करीब 6-7 बाहरी कर्मचारी प्रतिदिन भोजन करते हैं. रसोइया के अनुसार, जब उन्होंने सरकारी राशन के इस दुरुपयोग और दाल को पतला करने से इनकार किया, तो वार्डन ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और पद से हटाने की धमकियां देना शुरू कर दिया.
पंचों की बैठक में वार्डन ने ‘कबूला’ सच?
शिकायत के अनुसार, इस विवाद को सुलझाने के लिए 13 फरवरी 2026 को छात्रावास परिसर में एक सामाजिक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें करीब 10-12 पंच मौजूद थे. पीड़िता का दावा है कि इस बैठक में वार्डन मंजू रोत ने सबके सामने यह स्वीकार किया कि स्टाफ के अन्य लोग भी हॉस्टल में ही खाना खाते हैं, इसलिए राशन बचाने के लिए दाल पतली बनाना उनकी मजबूरी है.
जांच की मांग: बच्चों के भविष्य पर सवाल
यह मामला सरकारी बजट की बंदरबांट और गरीब छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की ओर इशारा करता है. सुशीला ने आरोप लगाया कि वार्डन अब उन्हें हटाने की साजिश रच रही हैं ताकि वे अपने मनमाफिक तरीके से राशन का उपयोग कर सकें. फिलहाल इस मामले की गूंज कलेक्ट्रेट तक पहुंच गई है और ग्रामीण भी इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

