डूंगरपुर नगर परिषद बोर्ड की अंतिम बैठक बुधवार को सभापति अमृतलाल कलासुआ की अध्यक्षता में परिषद सभागार में आयोजित की गई. कार्यकाल की इस अंतिम बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई, लेकिन टाइगर हिल्स मामले में बकाया राशि और स्लॉटर हाउस की जमीन के उपयोग को लेकर पार्षदों और प्रशासन के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
बैठक में टाइगर हिल्स जमीन मामले में बकाया 1 करोड़ रुपए की वसूली का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा. लंबे समय से राशि जमा नहीं होने पर सभापति और सदस्यों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की. इस पर परिषद ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि संबंधित को अंतिम नोटिस जारी किया जाए और सार्वजनिक प्रकाशन के माध्यम से सूचना दी जाए. यदि इसके बावजूद राशि जमा नहीं होती है, तो परिषद जमीन की कुर्की की कार्रवाई अमल में लाएगी.
स्लॉटर हाउस की जमीन पर विवाद और कमेटी का गठन
शहर में ध्वस्त किए गए स्लॉटर हाउस (वधशाला) की कीमती जमीन के भविष्य को लेकर बैठक में काफी विवाद हुआ. पार्षदों के बीच इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई कि वहां क्या बनाया जाए। चर्चा के दौरान तीन प्रमुख प्रस्ताव आए:
- आधुनिक पुस्तकालय
- सामुदायिक भवन
- गोशाला निर्माण
विवाद बढ़ता देख अंततः सभापति ने इस मामले के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी के गठन का निर्णय लिया. यह कमेटी जमीन के तकनीकी और सामाजिक पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का निर्माण कार्य तय किया जाएगा.
कर्मचारियों के लिए जीपीएफ का तोहफा
विवादों के बीच परिषद ने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया. बैठक में परिषद कर्मचारियों के लिए जीपीएफ (GPF) लागू करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. इसके साथ ही ऑडिट रिपोर्ट का भी अनुमोदन किया गया. बैठक के अंत में सभापति ने सभी पार्षदों और अधिकारियों का कार्यकाल के दौरान सहयोग के लिए आभार जताया. हालांकि, अंतिम बैठक होने के कारण कई मुद्दों पर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज दिखाई दी.

