
डूंगरपुर नगर परिषद के सभापति पद को लेकर पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक घमासान और सस्पेंस आखिरकार समाप्त हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व सभापति के.के. गुप्ता की पत्नी सुशीला गुप्ता के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है. पार्टी का बंद लिफाफा खुलते ही उनके नाम की घोषणा हुई, जिससे समर्थकों और शहरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई.

प्रभु पंड्या और सुशीला गुप्ता के बीच चल रहा था मंथन
सभापति पद की दौड़ में भाजपा के भीतर लंबे समय से सुशीला गुप्ता और प्रभु पंड्या के नामों को लेकर मंथन चल रहा था. स्थानीय राजनीति में सुशीला गुप्ता के नाम की चर्चाएं पहले से ही तेज थीं. जनादेश मिलने के बाद पार्टी आलाकमान ने गहन विचार-विमर्श के बाद सुशीला गुप्ता पर भरोसा जताया है.
21 सितंबर को पार्षदों का मतदान, नामांकन वापसी का अंतिम दिन आज
भले ही भाजपा ने सुशीला गुप्ता को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर सभापति का फैसला 21 सितंबर को होने वाले पार्षदों के मतदान से होगा. चुनाव मैदान में कांग्रेस के भारत नागदा और निर्दलीय प्रत्याशी प्रभु पंड्या भी अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं. शुक्रवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है, जिसके बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी.
के.के. गुप्ता के विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की चुनौती
सुशीला गुप्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती डूंगरपुर शहर को स्वच्छता और विकास के नए आयामों तक पहुंचाना होगा. उनके पति के.के. गुप्ता के सभापति कार्यकाल के दौरान डूंगरपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई थी. ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुशीला गुप्ता अपने पति के विकास की इस विरासत को किस तरह आगे बढ़ाती हैं.

