डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है. सरकारी संपत्तियों की रक्षा करने के बजाय, नगरपालिका प्रशासन द्वारा आरक्षित भूखंडों पर निजी व्यक्तियों के पक्ष में ‘भवन निर्माण स्वीकृति की उजरदारी’ (आपत्ति आमंत्रण) जारी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इसमें पालिका अधिकारियों और कार्मिकों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
अंबेडकर भवन के लिए आवंटित जमीन पर ‘नज़र’
नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र खोडनिया ने इस पूरे खेल का खुलासा किया है. उनके अनुसार, वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत पुनर्वास कॉलोनी (ब्लॉक-सी) में प्लॉट संख्या 8 (5400 वर्ग फीट) को अंबेडकर भवन के लिए आवंटित किया गया था. इस जमीन के लिए कडाणा विभाग और जिला कलेक्टर से NOC भी मिल चुकी थी और तत्कालीन विधायक अनीता कटारा ने इसका शिलान्यास भी किया था. हैरानी की बात यह है कि इसी प्लॉट पर प्रतापगढ़ निवासी यूसुफ नामक व्यक्ति ने निर्माण स्वीकृति के लिए आवेदन किया और नगरपालिका ने बिना रिकॉर्ड जांचे 30 जनवरी को उजरदारी भी निकाल दी.
एक नहीं, दो सरकारी प्लॉटों पर धांधली
भ्रष्टाचार का यह कथित खेल यहीं नहीं थमा. अंबेडकर भवन के पास स्थित प्लॉट संख्या 7, जो पूरी तरह नगरपालिका की अपनी संपत्ति है, उस पर भी दिवड़ा छोटा निवासी एक व्यक्ति के नाम की उजरदारी जारी कर दी गई. डिजिटल मैप और ऑनलाइन रिकॉर्ड के इस दौर में, मौके का निरीक्षण किए बिना सरकारी जमीन पर निजी मालिकाना हक की प्रक्रिया शुरू करना पालिका की कार्यप्रणाली पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करता है.
SDM ने दिए जांच के आदेश
मामला तूल पकड़ने के बाद सागवाड़ा एसडीएम ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रकरण उनके संज्ञान में है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. एसडीएम ने आश्वस्त किया है कि यदि लापरवाही या मिलीभगत पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. अब देखना यह होगा कि सरकारी संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने की इस कोशिश में शामिल ‘सफेदपोशों’ और अधिकारियों पर प्रशासन क्या कड़ा एक्शन लेता है.

