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डूंगरपुर: ‘वेस्ट से वंडर’ की अनूठी पहल, पुराने कलपुर्जों से बनी कलाकृतियों से संवर रहे शहर के पार्क

डूंगरपुर स्वच्छता के क्षेत्र में देश भर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाला डूंगरपुर शहर अब ‘वेस्ट से वंडर’ (कचरे से कलाकृति) थीम पर नया आकर्षण केंद्र बन रहा है. राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत नगर परिषद द्वारा बेकार हो चुकी वस्तुओं से आकर्षक कलाकृतियां तैयार कर शहर के प्रमुख पार्कों में स्थापित की जा रही हैं.

तीर्थंकर पार्क में शुरू हुआ स्थापना कार्य

नगर परिषद सभापति अमृत कलासुआ के प्रयासों से वसुंधरा विहार स्थित तीर्थंकर पार्क में इन स्कल्पचर्स (कलाकृतियों) को लगाने का काम शुरू हो चुका है. शहर के विभिन्न उद्यानों में कुल आठ कलाकृतियां लगाई जानी हैं, जिनमें से चार को तीर्थंकर पार्क में स्थापित किया जा रहा है. ये डमी न केवल पार्कों की सुंदरता बढ़ा रही हैं, बल्कि शहरवासियों को स्वच्छता का संदेश भी दे रही हैं.

मोटरसाइकिल और कारों के कचरे से बने ऊंट और चीता

इन कलाकृतियों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें पूरी तरह से बेकार सामान जैसे मोटरसाइकिल, कार और साइकिल के पुराने पुर्जों से तैयार किया गया है. कबाड़ के रूप में पड़े लोहे के सामान से ऊंट, चीता और हाथी जैसे आठ आकर्षक डमी बनाए गए हैं. इससे पहले भी तहसील चौराहा, शास्त्री कॉलोनी पार्क और बर्ड सेंचुरी में लगाए गए ऐसे उत्पादों को जनता ने काफी सराहा था.

युवाओं के लिए प्रेरणा और स्टार्टअप का सुझाव

सभापति अमृत कलासुआ ने इस अवसर पर युवाओं का आह्वान किया कि वे ‘वेस्ट से वंडर’ के कांसेप्ट को अपनाएं. उन्होंने कहा, “हमें कचरे से उपयोगी सामान बनाने के स्टार्टअप पर काम करने की आवश्यकता है. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सौंदर्य भी बढ़ता है.

पर्यावरण और पर्यटन को बढ़ावा

नगर परिषद की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरों और कारखानों से निकलने वाले व्यर्थ सामान का रचनात्मक उपयोग करना है. इससे कचरा प्रबंधन में मदद मिल रही है और पर्यटकों के लिए नए फोटो पॉइंट्स भी विकसित हो रहे हैं.

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