डूंगरपुर जिले के बेरोजगार हैंडपंप मिस्त्रियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नियमित भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर मिस्त्रियों ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री (PHED), राजस्थान सरकार को एक ज्ञापन भेजकर अपनी व्यथा सुनाई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग की अनदेखी के चलते हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है.
35 वर्षों से नहीं हुई कोई स्थाई भर्ती
मिस्त्रियों ने ज्ञापन में एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया है. उनके अनुसार, प्रदेश में हैंडपंप मिस्त्री के पदों पर अंतिम बार नियमित भर्ती लगभग 35 वर्ष पहले हुई थी. इसके बाद से अब तक विभाग ने कोई स्थाई नियुक्ति नहीं की है, जबकि जिले सहित पूरे राजस्थान में सैकड़ों पद रिक्त चल रहे हैं.
बजट घोषणाओं के बाद भी नहीं निकला विज्ञापन
मिस्त्रियों ने आरोप लगाया कि:
- पूर्व के बजट में सरकार ने हैंडपंप मिस्त्री भर्ती के लिए बजट का प्रावधान किया था, लेकिन धरातल पर विज्ञापन जारी नहीं हुआ.
- वर्तमान बजट में भी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से युवाओं में भारी रोष व्याप्त है.
- अधिकांश मिस्त्री ITI प्रशिक्षित हैं, फिर भी उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है.
सिर्फ गर्मी में मिलता है काम, फिर हो जाते हैं बेरोजगार
ज्ञापन में मिस्त्रियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि विभाग उन्हें केवल भीषण गर्मी के मौसम में दैनिक वेतन पर कार्य पर रखता है. जैसे ही गर्मी का सीजन समाप्त होता है, उन्हें काम से हटा दिया जाता है. इस अस्थाई व्यवस्था के कारण कई योग्य मिस्त्री अब सरकारी नौकरी की निर्धारित आयु सीमा (Age Limit) पार करने की कगार पर हैं.
स्थाई समाधान की मांग
मिस्त्रियों ने मंत्री से मांग की है कि रिक्त पदों पर शीघ्र विज्ञापन जारी कर उन्हें स्थाई रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रदेश की पेयजल व्यवस्था सुचारू हो सके और बेरोजगारों को न्याय मिल सके.

