डूंगरपुर जिले के पाल निठाउवा गांव में सरकारी संपत्तियों और राजस्व रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है. सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्री पहुंचकर प्रदर्शन किया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों का मुख्य आरोप खसरा संख्या 2982 (क्षेत्रफल 1.5209 हेक्टेयर) को लेकर है. राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन ‘बिलानाम’ दर्ज है, लेकिन हकीकत में यहाँ वर्षों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और ग्राम पंचायत भवन संचालित हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी, गिरदावर और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) ने मिलीभगत कर धरातल पर बनी इन इमारतों को कागजों में ‘गायब’ कर दिया और जमीन को खाली दर्शाया है.
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर मिलीभगत के आरोप
ज्ञापन में बताया गया कि नए राजस्व गांव ‘धुलेव’ के सीमांकन की आड़ में इस बेशकीमती जमीन को हड़पने की साजिश रची जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि:
- नियमों को ताक पर रखकर नवीन गांव धुलेव की दूरी मुख्य गांव से मात्र 1.5 किमी दर्शाई गई है.
- पूर्व सरपंच पति ने बिना किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति, ग्रामसभा या वार्ड पंचों की सहमति के पुराने पंचायत भवन को गिरा दिया.
- फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन को नए गांव के रिकॉर्ड में शामिल करने की कोशिश की जा रही है.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- खसरा संख्या 2982 की राजस्व प्रविष्टि की तुरंत जांच हो.
- जांच पूरी होने तक जमीन पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए.
- स्कूल और पंचायत भवन की जमीन को पाल निठाउवा के नाम ही सुरक्षित रखा जाए.
- फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस भू-माफिया तंत्र और लापरवाह अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे.

