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भारतीय मजदूर संघ का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, बजट में श्रमिकों की अनदेखी का आरोप

भारतीय मजदूर संघ (BMS) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर श्रमिकों और कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदेश बजट में श्रमिक वर्ग की कथित अनदेखी से नाराज सैकड़ों की संख्या में श्रमिक, पेंशनर, संविदाकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी और मिड डे मील कर्मी कलेक्ट्रेट पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रमुख मांगें और ज्ञापन

प्रदर्शन के पश्चात संघ के पदाधिकारियों ने देश के प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि हालिया प्रदेश बजट में मेहनतकश वर्ग के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है.

ज्ञापन में उठाई गई मुख्य मांगें

ईपीएफ (EPF) पेंशन: न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए.

आंगनबाड़ी एवं आशा कर्मी: इन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देते हुए न्यूनतम मानदेय 25,000 रुपये निर्धारित किया जाए.

पेंशनर्स: सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी वेतन आयोग के लाभों से जोड़ा जाए.

सामाजिक सुरक्षा: सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी का लाभ अनिवार्य रूप से लागू हो.

मिड डे मील कर्मी: संविदा पर कार्यरत कर्मियों के लिए सुरक्षित भविष्य और बेहतर वेतनमान की नीति बने.

हजारों हाथों ने उठाई आवाज

आंदोलन के दौरान श्रमिक नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां धरातल पर काम करने वाले उन लोगों के खिलाफ हैं जो समाज की नींव रखते हैं. वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा.प्रदर्शन में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आए श्रमिकों की भारी भीड़ ने व्यवस्थाओं को व्यस्त रखा। मजदूर संघ का कहना है कि महंगाई के इस दौर में अल्प मानदेय पर काम करना अब संभव नहीं रह गया है, इसलिए सरकार को बजट में संशोधन कर श्रमिक कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

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