राजस्थान के डूंगरपुर जिले में इंडसइंड निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के भीतर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है. कंपनी के ही तीन कर्मचारियों ने मिलकर ‘क्लेम गेम’ के जरिए करीब 58 लाख रुपये की राशि पर हाथ साफ कर दिया. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से भारी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
जांच में सामने आया कि ये कर्मचारी उन पॉलिसियों को निशाना बनाते थे जो या तो मृत व्यक्तियों की थीं, या वर्षों से अनक्लेम्ड (दावा न की गई) पड़ी थीं। आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर की:
- फर्जी दस्तावेज: आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और चेकबुक तैयार किए.
- खातों में हेरफेर: पॉलिसीधारकों के मूल रिकॉर्ड को बदलकर अपनी पसंद के बैंक खातों की जानकारी फीड कर दी.
- रकम ट्रांसफर: जैसे ही क्लेम की राशि रिलीज होती, वह असली हकदार के बजाय आरोपियों द्वारा संचालित फर्जी खातों में पहुंच जाती थी.
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी मनीष कुमार के निर्देशन में कोतवाली थाना पुलिस, विशेष टीम और साइबर सेल ने संयुक्त रूप से बीमा कंपनी की शाखा पर छापा मारा. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, मोबाइल फोन और संदिग्ध रिकॉर्ड जब्त किए हैं. एसपी मनीष कुमार के अनुसार, “पकड़े गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस खेल में क्या कंपनी के कुछ और लोग या बाहरी गिरोह भी शामिल है.
सावधान रहें पॉलिसीधारक
यह घटना उन लोगों के लिए एक सबक है जिनकी बीमा पॉलिसियां लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलिसीधारकों को समय-समय पर अपने नॉमिनी और बैंक विवरणों की जांच करते रहना चाहिए ताकि ऐसे साइबर और इंटरनल फ्रॉड से बचा जा सके.

