अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के आह्वान पर बुधवार को राजस्थान पेंशनर समाज, जिला शाखा डूंगरपुर ने केंद्र सरकार की पेंशनर विरोधी नीतियों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ‘वैधता अधिनियम 2025’ को पेंशनर हितों पर कुठाराघात बताते हुए जिले के सैकड़ों पेंशनरों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर इस अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की.
क्यों मनाया गया ‘काला दिवस’?
पेंशनर समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि 29 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना और लोकसभा द्वारा पारित वित्त विधेयक के एक वर्ष पूर्ण होने पर आज, 25 मार्च 2026 को देशभर में ‘काला दिवस’ मनाया जा रहा है. पेंशनरों का आरोप है कि नया ‘वैधता अधिनियम 2025’ केंद्र सरकार को पेंशनरों का वर्गीकरण करने और उनके बीच भेदभाव पैदा करने का अनुचित अधिकार देता है. यदि यह कानून प्रभावी रहता है, तो पेंशनर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला संरक्षक नानुराम माली, प्रदेश संयुक्त महामंत्री दिनेश श्रीमाल और जिला अध्यक्ष विनय शर्मा ने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा है. सरकार का यह कदम माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘नकारा बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का स्पष्ट उल्लंघन है. इस कानून से विशेषकर 1 जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को अपूरणीय क्षति हो रही है.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पेंशनर समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस दमनकारी अधिसूचना को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कलेक्ट्रेट पर हुए इस प्रदर्शन में जिले भर के सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनर समाज के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे.

