राजस्थान के डूंगरपुर जिले में मंगलवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों और मिड-डे-मील वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी. ‘सीटू’ (CITU) यूनियन के बैनर तले आयोजित इस देशव्यापी आह्वान के तहत कार्यकर्ताओं ने ‘काला दिवस’ मनाया. बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची महिलाओं ने काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
प्रमुख मांगें: राज्य कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक वेतन
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की. उनकी सबसे प्रमुख मांग आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी घोषित करना है. कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता, तब तक उन्हें 26 हजार से 30 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए, ताकि वे इस महंगाई के दौर में अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और बकाया मानदेय पर नाराजगी
यूनियन ने मांग उठाई कि वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशानुसार सभी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी, पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ दिया जाए. वहीं, मिड-डे-मील कुक-कम-हेल्पर्स ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उन्हें दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक का बकाया मानदेय अभी तक नहीं मिला है. उन्होंने सरकार से इस राशि को तुरंत जारी करने की गुहार लगाई है.
ऑनलाइन कार्य और तकनीकी अनिवार्यता का विरोध
कार्यकर्ताओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा बिना मोबाइल फोन उपलब्ध कराए ऑनलाइन कार्य, पीसीटीएस (PCTS), ई-केवाईसी और फेस रिकग्निशन जैसी प्रणालियों को अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे फील्ड में काम करने वाली महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो यह आंदोलन केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले समय में पूरे राजस्थान में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी. इस दौरान भारी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

