डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सत्तू के देवकी गांव में सोमवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा पेश आया. तेज अंधड़ और तूफान के कारण एक पुराना कच्चा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया. इस हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक गरीब पशुपालक की 21 बकरियों की मौत हो गई, जबकि दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए.
50 साल पुराना था मकान, अंधड़ बना काल
मिली जानकारी के अनुसार, देवकी निवासी मोगा पुत्र भेमजी पारगी का करीब 50 वर्ष पुराना कच्चा केलुपोश मकान सोमवार दोपहर आए तेज अंधड़ को झेल नहीं पाया. तूफान के दबाव से मकान की एक तरफ की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई. दीवार बाहर की तरफ गिरी, जिसकी चपेट में आने से मोगा का पुत्र मोतीलाल और गांव का ही दिनेश गंभीर रूप से घायल हो गए. परिजनों ने आनन-फानन में दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां मोतीलाल के पीठ और हाथों में चोटें आई हैं, वहीं दिनेश के सिर पर गंभीर घाव लगे हैं.
मलबे में दब गई आजीविका
हादसा उस वक्त और भी हृदयविदारक हो गया जब पता चला कि जिस तरफ दीवार गिरी, वहां छाया होने के कारण मोगा की सभी बकरियां बैठी हुई थीं. दीवार गिरते ही सभी बकरियां मलबे के नीचे दब गईं. ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद मलबे से 21 बकरियों को मृत अवस्था में बाहर निकाला. इस हादसे में केवल 3 बकरियां घायल बची हैं, जबकि एक बकरी दीवार गिरने से ठीक पहले भागने में सफल रही.
पीड़ित परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मोगा पारगी के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन ये बकरियां ही थीं. एक साथ 21 बकरियों की मौत हो जाने से पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. घटना की सूचना मिलते ही सत्तू सरपंच काली देवी, समाजसेवी शांतिलाल, ग्राम विकास अधिकारी नरेंद्र अहारी और पटवारी प्रवीण सिंह पंवार मौके पर पहुंचे.
पशु चिकित्सा विभाग से एलएसए सुभाष परमार और दोवड़ा थाना पुलिस से हेड कांस्टेबल महेंद्र सिंह ने भी घटनास्थल का मुआयना कर मौका पर्चा तैयार किया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से गरीब पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है.

