राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार प्रदेश भर में शुरू हुए ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान के तहत मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय नूतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम सुरेश प्रसाद ने विद्यार्थियों को मोबाइल के बढ़ते खतरों और जीवन में अनुशासन के महत्व पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया.
मोबाइल की लत है भविष्य के लिए घातक
छात्रों को संबोधित करते हुए न्यायाधीश राम सुरेश प्रसाद ने कड़े शब्दों में कहा कि मोबाइल फोन एक ऐसा नशा है जो धीरे-धीरे युवाओं के भविष्य को निगल रहा है. उन्होंने बताया कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग न केवल एकाग्रता कम करता है, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता और याददाश्त (Memory) के लिए भी गंभीर खतरा है. देर रात तक स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ रही हैं.
मैदानी खेलों और किताबों की ओर लौटें छात्र
न्यायाधीश ने छात्रों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलकर किताबों से दोस्ती करें. उन्होंने कबड्डी, बैडमिंटन और क्रिकेट जैसे फिजिकल गेम्स में सक्रिय होने की प्रेरणा दी. साथ ही, उन्होंने साइबर अपराधों के प्रति आगाह करते हुए चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री शेयर करना या डाउनलोड करना एक गंभीर कानूनन अपराध है, जिसमें फंसने के बाद निकलना बेहद मुश्किल होता है.
अभिभावकों को भी दी कड़ी नसीहत
कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों के मोबाइल उपयोग पर पैनी नजर रखें. बच्चों का फोन समय-समय पर चेक करना जरूरी है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के गलत रास्ते पर जाने से समय रहते रोका जा सके.

