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प्रतापगढ़: महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, भव्य शोभायात्रा से दिया सामाजिक एकता का संदेश

प्रतापगढ़ महान समाज सुधारक और ‘सत्यशोधक समाज’ के संस्थापक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती शनिवार को प्रतापगढ़ जिले में बड़े ही श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक समरसता के साथ मनाई गई. इस अवसर पर माली समाज द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में समाज के उत्थान और शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प दोहराया गया.

माली खेड़ा से कालका माता मंदिर तक निकली भव्य शोभायात्रा

जयंती समारोह का मुख्य आकर्षण माली खेड़ा से निकाली गई भव्य शोभायात्रा रही. शनिवार दोपहर माली खेड़ा स्थित सांवरिया जी मंदिर से ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे की मधुर धुनों के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ. शोभायात्रा में समाज की महिलाएं, पुरुष और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक शामिल हुए.

यह यात्रा माली खेड़ा के प्रमुख मार्गों से होते हुए नीमच नाका मार्ग से गुजरी और अंत में कालका माता मंदिर परिसर पहुंची. पूरी यात्रा के दौरान वातावरण महात्मा फुले के जयकारों से गूंज उठा.

महात्मा फुले के आदर्शों को अपनाने का संकल्प

कालका माता मंदिर पहुंचने पर समाज के वरिष्ठ जनों और युवाओं ने महात्मा फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर विशेष आरती उतारी. इस दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि फुले ने अपना पूरा जीवन अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष में समर्पित कर दिया. उन्होंने विशेष रूप से पिछड़े वर्ग और महिलाओं की शिक्षा के लिए जो कार्य किए, वे आज भी समाज के लिए प्रेरणापुंज हैं.

सामूहिक भोज के साथ हुआ समापन

धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर परिसर में सामूहिक भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने शिरकत कर आपसी भाईचारे और एकता का परिचय दिया. आयोजन समिति ने बताया कि इस द्विशताब्दी जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए समाज के हर वर्ग ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई.

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