उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग पर हुए जानलेवा हमले की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है. घटना के 12 दिन बाद पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी साजिश दूध व्यवसाय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आपसी रंजिश के चलते रची गई थी.
व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बनी हमले की वजह
गोगुंदा थानाधिकारी श्यामसिंह चारण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी लक्ष्मणसिंह (निवासी वणी) और टीकम चंद उर्फ टिकसा ने मिलकर इस हमले की योजना बनाई थी. जांच में सामने आया कि पीड़ित शंकरलाल पालीवाल (65 वर्ष) और आरोपी लक्ष्मणसिंह दोनों ही दूध सप्लाई का काम करते हैं. वणी और सेमटाल क्षेत्र में शंकरलाल के बढ़ते काम से लक्ष्मणसिंह ईर्ष्या रखता था. उसे लगा कि शंकरलाल को रास्ते से हटाकर वह पूरे क्षेत्र के दूध व्यवसाय पर कब्जा कर लेगा.
1 लाख रुपये में दी थी सुपारी
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि लक्ष्मणसिंह ने मुंबई में रहने वाले अपने साथी मनोहर सिंह के जरिए बदमाशों से संपर्क साधा था. उसने आरोपी मनीष गमेती के साथ मिलकर हमला करने के लिए 1 लाख रुपये का सौदा तय किया. 2 अप्रैल को जब शंकरलाल अपनी बाइक से दूध लेकर गोगुंदा लौट रहे थे, तभी सुनसान रास्ते पर तीन नकाबपोश बदमाशों ने धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमलावर उन्हें मृत समझकर मौके से फरार हो गए थे.
100 से अधिक CCTV कैमरों ने खोला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गहन जांच शुरू की. पुलिस टीम ने इलाके के 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों पर नजर रखी। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँचने में सफल रही.
तीन आरोपी अब भी फरार
इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को तो दबोच लिया है, लेकिन हमले में शामिल मनीष गमेती, वीरेन्द्र सिंह उर्फ विजु और मनोहर सिंह अभी फरार हैं. पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं. थानाधिकारी ने दावा किया है कि जल्द ही शेष आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा. फिलहाल घायल बुजुर्ग का उपचार जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है.

