बांसवाड़ा क्षेत्र के बहुचर्चित अनिल हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सिद्धार्थ और उसकी पत्नी लक्ष्मी को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही, लंबे समय से फरार चल रहे सागबारी सरपंच प्रकाशचंद्र निनामा और एक अन्य आरोपी मोतीलाल को भी पुलिस ने डिटेन (हिरासत में) कर लिया है. इस खुलासे के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है.
पत्नी की चुप्पी ने बनाया अपराधी
पुलिस अधीक्षक (SP) सुधीर जोशी ने बताया कि लक्ष्मी की भूमिका इस जघन्य हत्याकांड में संदिग्ध पाई गई है. जाँच में सामने आया कि जब सिद्धार्थ अनिल के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहा था, तब लक्ष्मी वहीं मौजूद थी. उसने न तो अपने पति को रोकने की कोशिश की और न ही इस घटना की जानकारी पुलिस या परिजनों को दी. एसपी के अनुसार, किसी अपराध को होते देखना और उसे न रोकना या सूचना छिपाना भी मिलीभगत की श्रेणी में आता है, इसी आधार पर पुलिस ने पति-पत्नी दोनों को गिरफ्तार किया है.
सागबारी सरपंच से पूछताछ जारी, साजिश का आरोप
मामले में फरार चल रहे सागबारी सरपंच प्रकाशचंद्र निनामा और मोतीलाल की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी. कई टीमों की दबिश के बाद अंततः पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है.
गौरतलब है कि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के समर्थक और परिजन सरपंच पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाकर लगातार धरने पर बैठे थे. पुलिस अब सरपंच से हर पहलू पर पूछताछ कर रही है कि इस हत्याकांड में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी.
क्या था मामला?
जाँच में यह भी सामने आया है कि मारपीट के बाद सरपंच प्रकाश ने ही मृतक के भाई और बीएपी नेता अशोक निनामा को फोन कर घटना की जानकारी दी थी. अब पुलिस इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि क्या यह महज सूचना थी या सोची-समझी साजिश का हिस्सा.
पुलिस की चेतावनी: एसपी सुधीर जोशी ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल हिरासत में लिए गए सरपंच और मोतीलाल से गहन पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

