डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का धैर्य जवाब दे गया है. पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिलने और लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों के विरोध में राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) के बैनर तले डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है. शुक्रवार को जिले के सरकारी डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया.
आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं रक्षक
एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. विजय मीणा ने बताया कि अस्पताल के 80 से अधिक डॉक्टर और शैक्षणिक स्टाफ पिछले तीन महीनों से बिना वेतन के लगातार सेवाएं दे रहे हैं. वेतन न मिलने के कारण डॉक्टरों के सामने ईएमआई, बच्चों की फीस और घरेलू खर्चों का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं.
मरीजों का इलाज जारी, पर आंदोलन की राह पर
शुक्रवार को अस्पताल के ओपीडी और अन्य विभागों में डॉक्टर अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर मरीजों का उपचार करते नजर आए. डॉक्टरों ने साफ किया कि वे मरीजों की सेवा में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन पेट की भूख और बुनियादी जरूरतों के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है. उन्होंने राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी (राजमेस) और स्थानीय प्रशासन से बजट संबंधी रुकावटों को हटाकर तुरंत वेतन जारी करने की मांग की है.
कल से 1 घंटे की पेनडाउन स्ट्राइक
डॉक्टरों ने सरकार और प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी है. एसोसिएशन के अनुसार, यदि शुक्रवार शाम तक वेतन जारी करने की ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो शनिवार से प्रतिदिन 1 घंटे की ‘पेन डाउन’ हड़ताल की जाएगी. इस दौरान डॉक्टर अपनी सीटों पर रहेंगे लेकिन किसी भी प्रकार का कागजी काम या परामर्श नहीं देंगे. यदि इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को उग्र करते हुए पूर्ण कार्य बहिष्कार जैसा सख्त कदम भी उठाया जा सकता है.

