Headlines

प्रतापगढ़: वैशाख पूर्णिमा पर हुई वन्यजीव गणना, वन क्षेत्रों में पैंथर और उड़न गिलहरी सहित कई वन्यजीव आए नजर

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए उत्साहजनक खबर है. प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वैशाख माह की पूर्णिमा पर ‘वॉटर हॉल पद्धति’ (Water Hole Census) के माध्यम से वन्यजीवों की गणना संपन्न हुई. 1 मई से 2 मई 2026 तक चले इस 24 घंटे के अभियान में जिले के वन क्षेत्रों में जैव-विविधता की सुखद तस्वीर सामने आई है.

69 वॉटर हॉल पर तैनात रहे कर्मचारी

उप वन संरक्षक (प्रतापगढ़) सुरेश अग्रवाल ने बताया कि वन मंडल के अधीन आने वाली सभी 6 रेंज में कुल 69 वॉटर हॉल (पानी के स्त्रोतों) पर गणना की गई. यह गणना 1 मई शाम 5:00 बजे से शुरू होकर अगले दिन 2 मई शाम 5:00 बजे तक निरंतर चली. प्रत्येक वॉटर हॉल पर निगरानी के लिए 3 से 4 वन कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी. वन विभाग द्वारा कर्मचारियों के लिए मचान, टॉर्च, डंडे और भोजन-पानी की समुचित व्यवस्था की गई थी.

प्रमुख वन्यजीवों के आंकड़े

गणना के दौरान प्रतापगढ़ के जंगलों में वन्यजीवों की संपन्नता देखने को मिली। आंकड़ों के अनुसार वन क्षेत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित वन्यजीव पाए गए:

  • पैंथर: 22
  • उड़न गिलहरी: 9 (सीतामाता अभयारण्य की विशेषता)
  • नीलगाय: 859
  • सियार: 501
  • लंगूर: 2808
  • मोर: 1093
  • अन्य: जरख (67), जंगली बिल्ली (59), लोमड़ी (99), बिज्जू (60), पेंगोलिन (43), चौसिंगा (25), जंगली सूअर (426) और सेही (33)।

प्रतापगढ़ वन मंडल के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों का संरक्षण बेहतर तरीके से हो रहा है और उनकी संख्या में स्थिरता बनी हुई है. विशेष रूप से पैंथर और दुर्लभ उड़न गिलहरी की मौजूदगी वन क्षेत्र की अच्छी सेहत का प्रमाण है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *