राजस्थान के वागड़ अंचल में सक्रिय चैन स्नेचिंग गिरोह के खिलाफ डूंगरपुर की बिछीवाड़ा थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने गिरोह का खुलासा करते हुए चार शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है. इस गैंग ने डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जिलों में आतंक मचा रखा था और प्रारंभिक पूछताछ में आधा दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है.
क्या था पूरा मामला?
मामले की जानकारी देते हुए बिछीवाड़ा थानाधिकारी कैलाशचन्द्र सोनी ने बताया कि विगत 13 अप्रैल को उदयपुर जिले के कनबई निवासी 65 वर्षीय अमृतदेवी कलाल ने एक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. महिला ने बताया कि वह करौली में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भुवनेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए जा रही थीं. इसी दौरान बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने उनके गले से करीब 17 ग्राम वजनी सोने की चैन झपट ली और मौके से फरार हो गए.
पुलिस की रणनीति और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया. टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया. तकनीकी जांच और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को चिन्हित कर उन्हें दबोच लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजयदास (दोवड़ा), दिनेश खराड़ी, किरीट खराड़ी और गोपाल डामोर (चौरासी) के रूप में हुई है.
तीन जिलों में कबूली वारदातें
पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ में गिरोह ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने केवल बिछीवाड़ा ही नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ के पीपलखूंट, बांसवाड़ा के घाटोल और डूंगरपुर के चिखली व सरोदा क्षेत्रों में भी चैन स्नेचिंग की वारदातों को अंजाम दिया था. यह गिरोह मुख्य रूप से सुनसान रास्तों पर बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाता था.
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से लूटे गए गहनों की बरामदगी के प्रयास कर रही है. पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं और पूछताछ में कई अन्य वारदातों के खुलने की संभावना है. पुलिस टीम अब आरोपियों के नेटवर्क और चोरी का माल खरीदने वालों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है.

