आदिवासी समुदाय को “वनवासी” कहे जाने के विरोध में डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा ब्लॉक में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने साझा मोर्चा खोल दिया है. समाज की अस्मिता और पहचान से जुड़े इस मुद्दे को लेकर कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया गया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया.
दिल्ली के कार्यक्रम में बयान पर बढ़ा विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद पिछले दिनों 24 मई 2026 को नई दिल्ली में जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले आयोजित एक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ. आरोप है कि इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में समस्त आदिवासी समुदाय के लिए “वनवासी” शब्द का प्रयोग किया था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह शब्द आदिवासी समाज की मूल अस्मिता, विशिष्ट पहचान और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के पूरी तरह खिलाफ है.
“आदिवासी” पहचान से समझौता मंजूर नहीं
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी एक अलग गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक परंपरा और स्वतंत्र अस्तित्व है. “आदिवासी” शब्द केवल एक नाम नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासियों की पहचान है. इसे किसी भी राजनीतिक या सामाजिक मंच से कमजोर करने या बदलने का प्रयास किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
महामहिम राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और भारत आदिवासी पार्टी के पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से आदिवासी समाज ने देश के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि समाज के आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.

