राजस्थान के डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका के नए प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन रविवार को हंगामे और राजनीतिक खींचतान के बीच संपन्न हुआ. एक ओर जहां मंत्रोच्चार के बीच नई शुरुआत की गई, वहीं दूसरी ओर भाजपा पार्षदों के बहिष्कार और कांग्रेस की दूरी ने इस आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया.
संत सानिध्य में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्र संत पुलकसागर महाराज के पावन सानिध्य में हुआ. उन्होंने विधिवत नारियल फोड़कर निर्माण कार्य की नींव रखी. इस अवसर पर पूर्व सांसद कनकमल कटारा और भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल भी मौजूद रहे.
क्यों हुआ विरोध?
नगरपालिका के नए भवन के लिए चुनी गई जगह को लेकर पार्षदों में गहरा असंतोष है. भाजपा के कई पार्षदों ने पुरानी जगह को प्राथमिकता देते हुए नई जमीन पर निर्माण का विरोध किया और कार्यक्रम का पूरी तरह बहिष्कार किया. वहीं, कांग्रेस के पार्षदों ने भी इस आयोजन से दूरी बनाए रखी, जिससे सदन के भीतर की गुटबाजी सतह पर आ गई है.
विरोध के बावजूद, सागवाड़ा विधायक शंकर डेचा ने इसे नगर के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा: नई जगह पर हमारे पास 35 बीघा का विशाल भूखंड उपलब्ध है. यहाँ केवल नगरपालिका भवन ही नहीं, बल्कि भविष्य में कई बड़े प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं जो शहर के विस्तार और आधुनिक विकास में मील का पत्थर साबित होंगे. नाराज पार्षदों के मुद्दे पर विधायक ने स्पष्ट किया कि विकास की राह में संवाद जरूरी है और वे जल्द ही नाराज सदस्यों से बात कर समाधान निकालेंगे.
भविष्य की योजनाएं
प्रस्तावित नए भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. अधिकारियों का मानना है कि शहर के मुख्य हिस्से में भीड़भाड़ बढ़ने के कारण प्रशासनिक कार्यों के लिए अधिक जगह की आवश्यकता थी, जिसे यह नई लोकेशन पूरा करेगी. हालांकि, अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक गतिरोध के बीच निर्माण कार्य कितनी गति से आगे बढ़ पाता है.

