प्रतापगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ पुलिस ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है. पुलिस ने तस्करी की काली कमाई से अर्जित की गई करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह कार्रवाई एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 68एफ(1) के तहत अमल में लाई गई है.
हथुनिया थानाधिकारी ने तैयार किया था वित्तीय जांच का प्रस्ताव
थानाधिकारी हथुनिया उदयवीर सिंह द्वारा तस्कर शोयब मंसूरी की अवैध संपत्तियों की गहन वित्तीय जांच कर फ्रीजिंग का एक मजबूत प्रस्ताव तैयार किया गया था. इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भारत सरकार द्वारा अधिकृत सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासक, सफेमा (SAFEMA) एवं एनडीपीएस एक्ट, नई दिल्ली को भेजा गया था, जिसे 11 जून 2026 को स्वीकार कर लिया गया.
आई-20 कार से बरामद हुआ था 3 किलो से ज्यादा MDMA
मामले के अनुसार, 9 अक्टूबर 2024 को सदर निम्बाहेड़ा पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक आई-20 कार से 3 किलो 420 ग्राम एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स बरामद कर जोधपुर ग्रामीण निवासी रोशनलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया था. इस मामले की कड़ियां जब जोड़ी गईं, तो इस ड्रग्स तस्करी के तार प्रतापगढ़ के असावता निवासी मुख्य तस्कर शोयब मंसूरी से जुड़े मिले. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 अप्रैल 2026 को शोयब मंसूरी को भी गिरफ्तार कर लिया.
मां और पत्नी के नाम पर खरीदी थी करोड़ों की प्रॉपर्टी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि शोयब मंसूरी लंबे समय से अफीम, डोडाचूरा, एमडीएमए और ब्राउन शुगर की तस्करी कर रहा था. इस काली कमाई से उसने अपनी मां शेरबानों के नाम पर असावता में करीब 1.50 करोड़ रुपये का एक आलीशान मकान बनवाया था. इसके अलावा उसने रामगढ़ गांव में अपनी मां और पत्नी नाजमीन के नाम पर करोड़ों रुपये मूल्य की कुल 2.59 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी थी.

