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राजस्थान बजट: “ऊंट के मुंह में जीरा,” सांसद राजकुमार रोत ने प्रदेश सरकार पर लगाया सौतेला व्यवहार का आरोप

बांसवाड़ा/डूंगरपुर राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट पर भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के फायरब्रांड नेता और बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. सांसद रोत ने राज्य सरकार पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की अनदेखी करने और इस अंचल के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करने का गंभीर आरोप लगाया है.

शिक्षा के बजट पर उठाए सवाल

सांसद रोत ने कहा कि वागड़ और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद दयनीय हैl. हमें उम्मीद थी कि इस बजट में शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और भौतिक सुविधाओं को सुधारने के लिए किसी बड़े पैकेज की घोषणा होगी.l लेकिन, सरकार ने जो आंशिक बजट आवंटित किया है, वह “ऊंट के मुंह में जीरा” के समान है. उन्होंने इसे आदिवासी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया.

सिंचाई और पर्यटन कॉरिडोर की अनदेखी

क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांगों का जिक्र करते हुए राजकुमार रोत ने कहा कि आदिवासी अंचल में ट्राइबल टूरिज्म कॉरिडोर (Tribal Tourism Corridor) बनाने की मांग को बजट में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इसके अलावा:

  • माही और कडाणा बांध से बांसवाड़ा-डूंगरपुर के तालाबों और नदियों को आपस में जोड़कर एक वृहद सिंचाई परियोजना की उम्मीद थी.
  • इस परियोजना से हजारों किसानों की तकदीर बदल सकती थी, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस योजना नहीं दिखी.

बेरोजगार युवाओं को मिली निराशा

शिक्षित युवाओं के मुद्दों को उठाते हुए सांसद ने कहा कि राजस्थान के आदिवासी बेल्ट में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है. युवाओं को उम्मीद थी कि सरकार सरकारी नौकरियों के लिए किसी विशेष पैकेज या बड़े भर्ती अभियान की घोषणा करेगी, लेकिन युवाओं के हाथ केवल निराशा ही लगी है. राजकुमार रोत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह बजट आदिवासी समाज की अपेक्षाओं के विपरीत है और इसमें विकास के विजन की भारी कमी है.

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