राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सरदार पटेल सेना ने दोवड़ा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर मोर्चा खोल दिया है. पटेल सेना के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र डांगी ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और द्वेषवश कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.पूरा मामला मामूली मारपीट की घटना से शुरू हुआ, जो अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है.
क्या है पूरा विवाद?
सरदार पटेल सेना के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र डांगी के अनुसार, घटना 10 फरवरी की है जब वे दोवड़ा थाना क्षेत्र के इंदोड़ा गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. कार्यक्रम के दौरान रामजी पाटीदार और कुछ अन्य लोगों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई, जो देखते ही देखते मामूली हाथापाई में बदल गई. डांगी का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद रामजी पाटीदार ने दोवड़ा थाने पहुंचकर लिखित रिपोर्ट दी और रसीद भी प्राप्त की, लेकिन पुलिस ने उस समय उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की.
पुलिस पर भेदभाव के आरोप
महेंद्र डांगी ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बताया कि:
- पीड़ित पक्ष (रामजी पाटीदार) की रिपोर्ट को पुलिस ने दो दिनों तक लटकाए रखा.
- वहीं, दो दिन बाद दूसरे पक्ष से बालकृष्ण पाटीदार ने रिपोर्ट दी, जिस पर पुलिस ने बिना देरी किए गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया.
- हैरानी की बात यह है कि बीच-बचाव करने गए महेंद्र डांगी समेत अन्य लोगों को भी इस मामले में आरोपी बना दिया गया.
- रामजी पाटीदार की मूल रिपोर्ट पर पुलिस ने काफी देरी से यानी 14 फरवरी को मामला दर्ज किया.
ट्रैप की कार्रवाई से जुड़ा है मामला?
चर्चा है कि इस पूरे विवाद की जड़ में दोवड़ा थाने में कुछ समय पहले हुई एक ‘ट्रैप’ (एसीबी की कार्रवाई) को लेकर हुई बातचीत है. महेंद्र डांगी का संकेत है कि इसी रंजिश के चलते पुलिस उन्हें निशाना बना रही है और किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है.
उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार
अपनी गिरफ्तारी की आशंका और पुलिस के एकतरफा व्यवहार को देखते हुए महेंद्र डांगी ने अब जिला पुलिस अधीक्षक (SP), आईजी (IG) और डीजी (DG) को लिखित शिकायत भेजी है. उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके. पटेल सेना ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे.

