राजस्थान के डूंगरपुर जिले की पॉक्सो कोर्ट ने आज एक बेहद संवेदनशील और नृशंस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के दोषी को ‘शेष प्राकृतिक जीवन’ यानी अपनी आखिरी सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा सुनाई है.
क्या था पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना 4 अगस्त 2025 की है. निठाउवा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 6 साल की मासूम बच्ची स्कूल से घर लौटते समय अचानक लापता हो गई थी. जब परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, तो ‘आरएस वाला तालाब’ के पास वन विभाग की बाउंड्री के लिए खोदी गई एक नाली में मासूम का शव मिला. दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि बच्ची का शव उल्टा पड़ा था और उसका स्कूल बैग अभी भी उसकी पीठ पर ही लटका हुआ था.
पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट का कड़ा रुख

जांच में खुलासा हुआ कि 35 वर्षीय दरिंदे ने पहले बच्ची के साथ दरिंदगी की और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर पॉक्सो कोर्ट में चालान पेश किया. विशिष्ट लोक अभियोजक नरेश कलाल ने मामले की पैरवी करते हुए इसे समाज के लिए कलंक बताया और कड़ी सजा की मांग की.
ऐतिहासिक सजा और मुआवजा
कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अपराध की क्रूरता को देखते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए :-
आजीवन कारावास: दोषी को अब अपनी पूरी जिंदगी जेल में ही काटनी होगी.
जुर्माना: दोषी पर 3 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है.
मुआवजा: अदालत ने पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश भी जारी किए हैं.
विशिष्ट लोक अभियोजक ने कहा कि इस फैसले से न्याय की जीत हुई है. यह सजा समाज में उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो मासूमों की अस्मत से खेलने का दुस्साहस करते हैं। इस फैसले के बाद क्षेत्र में न्यायपालिका के प्रति विश्वास और सुदृढ़ हुआ है।

