राजस्थान के डूंगरपुर जिले की बिछीवाड़ा थाना पुलिस ने नेशनल हाईवे पर लूटपाट और आतंक का पर्याय बने शातिर अपराधी प्रदीप मीणा को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. आरोपी जिले के टॉप-10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था और उस पर 3,000 रुपये का इनाम भी घोषित था. “ऑपरेशन शिकंजा” के तहत की गई इस कार्रवाई ने हाईवे पर सक्रिय एक बड़ी लूट गैंग का पर्दाफाश किया है.
गुजरात में फरारी काट रहा था आरोपी
एसपी मनीष कुमार के निर्देशानुसार, बिछीवाड़ा थानाधिकारी कैलाशचंद्र सोनी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था. पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी प्रदीप मीणा (21), निवासी बिजुड़ा, गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्य गुजरात में ठिकाने बदल-बदल कर छिप रहा है. पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से जाल बिछाकर उसे धर दबोचा. प्रदीप के खिलाफ अब तक चोरी और लूट के करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं.
चार बड़ी वारदातों का खुलासा
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने नेशनल हाईवे-48 और आसपास के क्षेत्रों में लूट की चार प्रमुख वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है:
- बालदिया क्षेत्र: 2 अक्टूबर 2024 को एक मजदूर से 10 हजार रुपये और उसका सामान लूटा.
- आमझरा (NH-48): 26 फरवरी 2025 को एक बाइक सवार से 8 हजार रुपये, मोबाइल और उसकी बाइक छीन ली.
- रिजवा घाटी: 3 मार्च 2025 को सर्विस रोड पर मारपीट कर बाइक और 5 हजार रुपये की लूट की.
- भेहणा मार्ग: 3 मार्च को ही एक अन्य युवक से 3 हजार रुपये लूटकर फरार हो गया.
गैंग के तीन सदस्य पहले ही गिरफ्तार
थानाधिकारी कैलाश सोनी ने बताया कि इस गैंग के तीन अन्य सदस्य— पप्पू उर्फ भूपेन्द्र, विजेश उर्फ विजय और सुनील— को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. प्रदीप मीणा इस गैंग का मुख्य मोहरा था, जिससे अब पुलिस अन्य संभावित वारदातों और हथियारों की बरामदगी के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है. डूंगरपुर पुलिस की इस कार्रवाई से नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.

