राजस्थान के डूंगरपुर जिले में आज मंगलवार से निजी ट्रैवल्स संचालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. परिवहन विभाग की नीतियों और जिले में फिटनेस सेंटर की सुविधा न होने के विरोध में 500 से ज्यादा निजी बसों और करीब 700 से अधिक कमर्शियल वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद रहा. इस हड़ताल का सीधा असर मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े रूटों पर पड़ा है.
क्यों थमी बसों की रफ्तार?
निजी ट्रैवल्स एसोसिएशन के पदाधिकारी वल्लभराम पाटीदार ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा संचालकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है. विरोध का मुख्य कारण डूंगरपुर जिले में फिटनेस सेंटर का न होना है.
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार:
- डूंगरपुर के वाहनों को फिटनेस के लिए 100 किमी दूर उदयपुर या बांसवाड़ा जाना पड़ता है.
- आने-जाने का कुल सफर 200 किमी से अधिक हो जाता है, जिससे ईंधन और समय की बर्बादी होती है.
- छोटे व्यावसायिक वाहनों (ऑटो, जीप, क्रूजर) को भी दूसरे जिले में जाने के लिए फास्टैग और टोल टैक्स का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है.
- एक बार फिटनेस के चक्कर में वाहन मालिक को करीब 5,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ रहा है.
आम जनता बेहाल, व्यापार पर पड़ा असर
हड़ताल के कारण लोकल रूट पर चलने वाली बसें और जीपें भी बंद रहीं, जिससे ग्रामीण इलाकों से शहर आने वाले यात्रियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा. डूंगरपुर से सूरत, इंदौर और अहमदाबाद जैसे व्यापारिक केंद्रों के लिए स्लीपर बसों का संचालन रुकने से व्यापारियों और श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अनुमान के मुताबिक, इस एक दिन की हड़ताल से जिले में करीब 50 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है.
क्या है मांग?
ट्रैवल्स संचालकों की स्पष्ट मांग है कि जब तक डूंगरपुर जिले में स्थायी फिटनेस सेंटर नहीं खुल जाता, तब तक पूर्व की भांति परिवहन विभाग के कार्यालय से ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाएं. संचालकों ने चेतावनी दी है कि जो गाड़ियां अभी रूट पर हैं, वे वापसी के बाद खड़ी कर दी जाएंगी और मांगें पूरी होने तक संचालन शुरू नहीं होगा.

