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डूंगरपुर: अनाथ बहनों के हक पर डाका; मृत माता-पिता को ‘जिंदा’ दिखाकर डकार गए पीएम आवास का पैसा, 6 साल से न्याय को भटक रही मासूम

डूंगरपुर जिले की चीखली पंचायत समिति के गुंदलारा गांव से भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. यहां दो मासूम अनाथ बहनों के हक को छीनने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके मृत माता-पिता को कागजों में ‘जीवित’ दिखा दिया और प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की राशि हड़प ली.

क्या है पूरा घोटाला?

मामला गुंदलारा गांव का है, जहां 8 और 10 साल की दो बहनें अपने माता-पिता के साये के बिना जीवन यापन कर रही हैं. इनके माता-पिता की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी थी और स्वयं ग्राम पंचायत ने ही उनके मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए थे. इसके बावजूद, पंचायत और आवास योजना से जुड़े अधिकारियों ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर मृत माता-पिता के नाम पर पीएम आवास स्वीकृत कर दिया.

1.48 लाख रुपए का गबन

हैरानी की बात यह है कि इन मासूमों के सिर पर छत देने के बजाय, योजना की करीब 1.48 लाख रुपए की राशि लाभार्थियों (अनाथ बहनों) के बजाय किसी अन्य के खाते में ट्रांसफर कर दी गई. कागजों में घर का निर्माण पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में उन बच्चियों के पास रहने को सुरक्षित छत तक नहीं है.

6 साल से न्याय की गुहार

ये दोनों बहनें पिछले 6 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं. स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई न होने के बाद, अब इन बच्चियों ने हिम्मत जुटाकर जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की है. शिकायत में बताया गया कि कैसे सरकारी तंत्र ने उनकी लाचारी का फायदा उठाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है.

प्रशासनिक कार्यवाही

कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए हैं. विकास अधिकारी और संबंधित जांच दल अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि यह राशि किस खाते में गई और इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन से अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं.

यह मामला केवल आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला है. अब देखना यह होगा कि दोषियों पर क्या सख्त कार्रवाई होती है और इन अनाथ बहनों को उनका हक कब तक मिलता है.

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