डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा वन क्षेत्र के अंतर्गत गोवाड़ी गांव में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नेशनल हाईवे 927A के किनारे बने एक गहरे नाले में एक लेपर्ड (तेंदुआ) फंस गया. हाईवे के किनारे लेपर्ड होने की खबर जैसे ही फैली, आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए. हालांकि, वन विभाग की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया.
सर्विस लेन के पास नाले में फंसा था पैंथर
जिला वन अधिकारी (DFO) मोहित गुप्ता ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि सागवाड़ा के गोवाड़ी क्षेत्र में नेशनल हाईवे 927A के ओवरब्रिज के पास बनी सर्विस लेन के किनारे एक लेपर्ड नाले में गिरा हुआ है. नाला गहरा होने और दीवारों के कारण लेपर्ड बाहर निकलने में असमर्थ था. सूचना मिलते ही सागवाड़ा रेंज के रेंजर और वनकर्मियों की टीम पिंजरा और रेस्क्यू उपकरण लेकर मौके पर पहुंची.
भीड़ को हटाकर लगाया गया पिंजरा
लेपर्ड को देखने के लिए हाईवे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा आ रही थी. वनकर्मियों ने सबसे पहले भीड़ को मौके से सुरक्षित दूरी पर हटाया. इसके बाद नाले के निकास द्वार पर सावधानी से पिंजरा लगाया गया. कुछ देर इंतजार करने के बाद, जैसे ही लेपर्ड बाहर निकलने के लिए आगे बढ़ा, वह सीधे पिंजरे में जा फंसा.
JCB की मदद से निकाला बाहर
पिंजरे में लेपर्ड के कैद होने के बाद उसे नाले से बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती थी. वन विभाग ने मौके पर JCB मशीन बुलवाई और पिंजरे को सुरक्षित तरीके से बाहर खींचकर निकाला. इसके बाद पिंजरे को वाहन में लादकर सागवाड़ा वन रेंज कार्यालय ले जाया गया है.
दहशत के साये में थे ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र में लेपर्ड की आवाजाही बनी हुई थी, जिससे लोग खेतों में जाने से डर रहे थे. लेपर्ड ने पूर्व में कई मवेशियों का भी शिकार किया था. रेस्क्यू सफल होने के बाद गोवाड़ी और आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.
आगे की प्रक्रिया
वन विभाग के अनुसार, फिलहाल लेपर्ड को निगरानी में रखा गया है. स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Checkup) के बाद, उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार उसे फिर से सुरक्षित वन क्षेत्र या अभयारण्य में छोड़ दिया जाएगा.

