डूंगरपुर जिले में पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. शादियों और आयोजनों के इस सीजन में गैस की कमी ने आयोजकों और हलवाइयों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. स्थिति यह है कि अब आधुनिक गैस चूल्हों की जगह फिर से पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों ने ले ली है, जिससे काम की गति और बजट दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
शादी-ब्याह और सरकारी टेंडर पर संकट
वर्तमान में शादियों और ढूंढ का सीजन जोरों पर है, लेकिन गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता ने खुशियों के रंग में खलल डाल दिया है. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कैटरर्स अब लकड़ियों के ढेर पर निर्भर हैं। हलवाइयों का कहना है कि उनके पास सरकारी विभागों के भी टेंडर हैं, जिनकी सप्लाई समय पर करनी होती है. गैस के बिना बड़े आयोजनों को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं है. लकड़ी के चूल्हों पर आंच को नियंत्रित करना मुश्किल होता है, जिससे खाना बनाने में समय अधिक लगता है और धुएं के कारण काम करना दूभर हो जाता है.
शोक कार्यक्रमों में भी बढ़ी परेशानी
गैस की किल्लत का असर केवल मांगलिक कार्यों तक सीमित नहीं है. मृत्यु भोज (मौत-मरण) जैसे आकस्मिक शोक संतप्त कार्यक्रमों में भी परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अचानक होने वाले इन आयोजनों के लिए तुरंत सिलेंडर की व्यवस्था करना नामुमकिन साबित हो रहा है, जिससे शोकग्रस्त परिवारों पर अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ गया है.
प्रशासन से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग
स्थानीय हलवाई अनिल और संदीप ने बताया कि गैस न होने से वे पुराने समय की तरह लकड़ी और कोयले पर निर्भर हो गए हैं, जिससे काम की रफ्तार आधी रह गई है. स्थानीय नागरिकों और व्यापार मंडलों ने जिला प्रशासन व रसद विभाग से मांग की है कि शादियों के सीजन को देखते हुए जल्द से जल्द कमर्शियल सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

