डूंगरपुर. राजस्थान सरकार की ‘एक जिला-एक वनस्पति’ योजना के तहत डूंगरपुर जिले में सागवान (Teak) के संरक्षण और संवर्धन को लेकर वन विभाग द्वारा एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. शहर के एक निजी होटल में आयोजित इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने सागवान की गुणवत्ता सुधारने और भविष्य में इसकी व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने की बारीकियों पर गहन मंथन किया.
वैज्ञानिक पद्धति से तैयार होगी उन्नत पौध
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए सहायक वन संरक्षक (ACF) गौतम मीणा ने सागवान के पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि डूंगरपुर की जलवायु सागवान के वृक्षों के लिए अत्यंत अनुकूल है. कार्यशाला में मौजूद फॉरेस्ट रेंजरों, वन कर्मियों और प्रगतिशील किसानों को बताया गया कि किस प्रकार वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर सागवान की नर्सरी तैयार की जा सकती है. इसमें उत्तम बीजों का चयन, बीजों का उपचार और पौधों की देखरेख के आधुनिक तरीकों के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी गई.
किसानों की आर्थिक उन्नति का बनेगा आधार
गौतम मीणा ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि जिले में सागवान का रकबा बढ़ने से न केवल हरित क्षेत्र (Green Cover) में वृद्धि होगी, बल्कि यह भविष्य में किसानों के लिए एक बड़ा आय का स्रोत भी बनेगा. सागवान की लकड़ी की वैश्विक बाजार में भारी मांग है, ऐसे में इसकी व्यावसायिक खेती से किसानों को लंबी अवधि में बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकेगा.
सामूहिक संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम में वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समितियों के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में आमजन ने भाग लिया. कार्यशाला के समापन पर सभी उपस्थित सदस्यों ने सागवान के वनों को कटाई से बचाने, मौजूदा वनों का संरक्षण करने और अधिक से अधिक नई पौध लगाने का सामूहिक संकल्प लिया. विभाग का लक्ष्य है कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से जमीनी स्तर पर सागवान के संवर्धन को एक जन आंदोलन बनाया जाए.

