बांसवाड़ा गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिले के जंगलों में आग का तांडव शुरू हो गया है. पिछले 48 घंटों में बांसवाड़ा के दो अलग-अलग वन क्षेत्रों में भीषण आग लगने से भारी मात्रा में वन संपदा जलकर राख हो गई. गढ़ी उपखंड और गनोड़ा क्षेत्र में हुई इन घटनाओं ने वन विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी है, जहाँ ग्रामीणों ने विभाग पर समय पर कार्रवाई न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.

बाबा का कुआं: 48 घंटे तक मचता रहा तांडव
जौलाना के समीप स्थित ‘बाबा का कुआं’ जंगल पिछले दो दिनों से आग की लपटों में घिरा रहा. ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगने के तुरंत बाद वन विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. नतीजा यह रहा कि आग तेजी से फैली और देखते ही देखते सैकड़ों कीमती पेड़ और वनस्पति जलकर खाक हो गई.
दूसरे दिन मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारी भूरालाल चरपोटा ने बताया कि बीती रात ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. हालांकि, तब तक जंगल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका था.
गनोड़ा-घाटोल रोड पर मची अफरा-तफरी
वहीं, शुक्रवार दोपहर गनोड़ा-घाटोल मुख्य मार्ग पर अचानक आग लगने से राहगीरों में हड़कंप मच गया. सड़क किनारे के जंगलों से उठती ऊंची लपटों के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ. सूचना मिलते ही फोरेस्टर नारायण लाल, दीपक पाटीदार और कल्पेश पाटीदार की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के सहयोग से घेराबंदी कर आग को आगे बढ़ने से रोका.
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: रिस्पांस सिस्टम पर सवाल
जंगलों में बार-बार लग रही आग और विभाग की कथित “सुस्ती” को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है. ग्रामीणों का कहना है कि:
- सूचना के घंटों बाद भी विभागीय कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते.
- अग्नि सुरक्षा उपकरणों और पुख्ता रिस्पांस सिस्टम का अभाव है.
- समय पर कार्रवाई होती तो सैकड़ों पेड़ों को बचाया जा सकता था.

