बांसवाड़ा जिले में पेट्रोल और डीजल की किल्लत को लेकर मचे हाहाकार के बीच आज तेल कंपनियों ने कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. दामों में इस वृद्धि का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है. वहीं, पेट्रोल पंपों पर लग रही लंबी कतारों और कुछ पंपों के ड्राई होने के बाद जिला रसद विभाग और पेट्रोल पंप एसोसिएशन आमने-सामने आ गए हैं.
रसद विभाग का दावा: जिले में 6 दिन का पर्याप्त स्टॉक
जिला रसद अधिकारी (DSO) ओम प्रकाश जोतड़ ने जिले में किसी भी तरह की किल्लत से साफ इनकार किया है. उन्होंने आंकड़ों के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पैनिक (डर) की वजह से लोग जरूरत से ज्यादा तेल भरवा रहे हैं, जिससे संकट जैसी स्थिति दिख रही है.
- कुल पंप: जिले में HPCL, BPCL, IOCL और Reliance के 105 से अधिक आउटलेट्स हैं.
- मौजूदा स्टॉक: वर्तमान में जिले में 600 KL पेट्रोल और 800 KL डीजल उपलब्ध है.
- दैनिक खपत: जिले में रोज औसतन 100 KL पेट्रोल और 120 KL डीजल बिकता है.
DSO जोतड़ के अनुसार, जिले में आगामी 6 दिनों का एडवांस स्टॉक मौजूद है. रविवार को डिपो बंद होने और पेमेंट क्लियर न होने से सोमवार को कुछ पंप जरूर ड्राई हुए थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है.
एसोसिएशन का आरोप: कंपनियां कम बेचने का बना रहीं दबाव
दूसरी ओर, जिला पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिश्चंद्र कलाल ने संकट के लिए सीधे तौर पर पेट्रोलियम कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है. कलाल ने आरोप लगाया कि वागड़ क्षेत्र की मांग के मुकाबले कंपनियां सप्लाई में कटौती कर रही हैं.
“पेट्रोलियम व्यवसाय के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब कंपनियां ज्यादा बेचने के बजाय कम बेचने का दबाव बना रही हैं. कंपनियों ने मौखिक आदेश जारी कर कोटा लिमिट तय कर दी है.” – हरिश्चंद्र कलाल, अध्यक्ष (जिला पेट्रोल पंप एसोसिएशन)
उन्होंने बताया कि पहले रविवार की छुट्टी के दिन भी डिपो खोलकर सप्लाई दी जाती थी, लेकिन अब रविवार को डिपो पूरी तरह बंद रहते हैं और शनिवार को भी हाफ-डे कर दिया गया है, जिससे यह संकट गहराया है.

