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बांसवाड़ा: खेल-खेल में 5 साल के मासूम ने निगला ₹5 का सिक्का, गले में अटकी सांसें; ऑपरेशन की तैयारी के बीच हुआ ‘चमत्कार’

बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के चुड़ादा गांव में एक 5 वर्षीय मासूम द्वारा खेल-खेल में सिक्का निगलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. सिक्के के गले में अटकने से बच्चे की सांसें अटक गई थीं और उसकी जान पर आफत बन आई थी. लेकिन महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल के डॉक्टरों की तत्परता और एक अनोखे ‘चमत्कार’ से मासूम की जान सुरक्षित बच गई.

खेल-खेल में मुंह में डाला सिक्का, बिगड़ी तबीयत

मिली जानकारी के मुताबिक, चुड़ादा निवासी दिनेश का पांच वर्षीय पुत्र विशाल घर में खेल रहा था. इसी दौरान उसने खेल-खेल में ₹5 का सिक्का मुंह में डाल लिया, जो सीधे जाकर उसके गले में फंस गया. सिक्के के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और वह तड़पने लगा. बच्चे की यह हालत देख परिजन बुरी तरह घबरा गए और उसे तुरंत निजी वाहन से स्थानीय अस्पताल कुशलगढ़ लेकर पहुंचे. वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मासूम को तुरंत जिला मुख्यालय के एमजी अस्पताल रेफर कर दिया.

ऑपरेशन की तैयारी के बीच नीचे उतरा सिक्का

एमजी अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने आपातकालीन स्थिति को देखते हुए तुरंत विशाल का एक्स-रे करवाया. एक्स-रे में सिक्का सांस नली के बेहद नजदीक गले में फंसा हुआ दिखाई दिया, जिससे सांस रुकने का बड़ा खतरा था. डॉक्टरों ने बिना वक्त गंवाए मासूम को ऑपरेशन थिएटर (OT) में शिफ्ट किया और सिक्का निकालने की प्रक्रिया शुरू की. इसी दौरान डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी कर ही रहे थे कि सिक्का गले से सरक कर सीधे बच्चे के पेट में चला गया. मंगलवार शाम डॉक्टरों ने दोबारा एक्स-रे किया, जिसमें सिक्का पेट के सुरक्षित हिस्से में नजर आया और तत्काल ऑपरेशन की जरूरत टल गई.

डॉक्टर बोले- बच्चा स्वस्थ है, निगरानी में रखा

एमजी हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहन नदीम शेख ने बताया कि जब बच्चे को ऑपरेशन थिएटर में लेकर प्रक्रिया शुरू की जा रही थी, तभी सिक्का पेट में नीचे उतर गया. दोबारा एक्स-रे में स्थिति साफ होने के बाद डॉक्टरों ने राहत की सांस ली. फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और घबराने की कोई बात नहीं है. उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और अगले दो-तीन दिनों में सिक्का प्राकृतिक रूप से मलद्वार के रास्ते बाहर आ जाएगा. इस आपातकालीन प्रक्रिया में डॉ. शेख के साथ डॉ. शौयब, डॉ. हेमा, डॉ. सौरभ और डॉ. यज्ञराज की मेडिकल टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई.

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