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बांसवाड़ा: गाटिया गांव में युवक ने लगाया फंदा, जान तो बची पर नस दबने से बिगड़ा दिमागी संतुलन; रस्सियों से बांधकर ले गए उदयपुर

बांसवाड़ा सज्जनगढ़ थाना क्षेत्र के गाटिया गांव में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला बेहद अजीब और गंभीर मामला सामने आया है. यहाँ एक 25 वर्षीय युवक ने अज्ञात कारणों के चलते अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया. ऐन वक्त पर पहुंचे परिजनों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे फंदे से तो नीचे उतार लिया, जिससे उसकी जान बच गई. लेकिन, फंदे के तेज खिंचाव के कारण युवक के गर्दन की मुख्य नस दब गई, जिससे उसका दिमागी संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया.

होश आते ही करने लगा हिंसक हरकतें

जानकारी के अनुसार, गाटिया गांव निवासी आशीष (25) पुत्र नानका ने बुधवार को घर के भीतर फंदा लगा लिया था. परिजन उसे तुरंत महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल लेकर भागे, जहाँ डॉक्टरों ने त्वरित इलाज देकर उसकी सांसें तो लौटा दीं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, फंदे पर लटकने की वजह से गर्दन से दिमाग तक जाने वाली मुख्य नसें गंभीर रूप से दब गई थीं. इससे दिमाग को होने वाली ऑक्सीजन और ब्लड की सप्लाई रुक गई, जिसके चलते होश में आते ही युवक का दिमागी संतुलन हिल गया और वह अजीब व हिंसक हरकतें करने लगा.

आधी रात को रस्सियों से बांधकर ले जाना पड़ा उदयपुर

युवक इस कदर बेकाबू हो गया कि वह खुद को और आसपास के लोगों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने लगा. परिजनों ने उसे संभालने का बहुत प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई तो सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने युवक को रस्सियों से बांधा. शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे हालत और ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे बेहतर और विशेष न्यूरो इलाज के लिए उदयपुर लेकर रवाना हुए.

चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. हरीश चरपोटा ने बताया कि जब कोई व्यक्ति फांसी लगाने का प्रयास करता है, तो गर्दन की नसें दबने से ब्रेन (दिमाग) तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती. ऑक्सीजन की इस कमी के कारण दिमाग के सेल्स प्रभावित होते हैं, जिससे मरीज का व्यवहार हिंसक या पूरी तरह असामान्य हो जाता है. इस पीड़ित मरीज में भी हूबहू यही लक्षण देखे गए हैं.

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