उदयपुर जिले के खेरवाड़ा कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. यहाँ सीएचसी की लेखा शाखा (अकाउंट सेक्शन) के कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया. गनीमत यह रही कि प्लास्टर गिरने से कुछ ही देर पहले कमरे में कार्यरत कर्मचारी अपनी सीट छोड़कर दूसरे कमरे में गए थे, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई. हालांकि, मलबे की चपेट में आने से कमरे में लगा सीलिंग फैन और कुर्सियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. इस अचानक हुई घटना से परिसर में अफरा-तफरी मच गई और अस्पताल कर्मियों में डर का माहौल है.

बीसीएमओ बोले- भवन पुराना, मरम्मत का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन
मामले की जानकारी देते हुए खेरवाड़ा के ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) डॉ. अरुण मीणा ने बताया कि सीएचसी का भवन काफी पुराना हो चुका है, जिसके कारण जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ रहा है. भवन को ठीक कराने और मरम्मत का प्रस्ताव वर्तमान में प्रक्रियाधीन है.
जिले में 12 अस्पताल जर्जर, 4 भवनों को किया कंडम घोषित
यह घटना उदयपुर जिले में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति को बयां करती है. वर्तमान में जिले के 12 अस्पताल जर्जर स्थिति में हैं। इनमें से छाणी, कोल्यारी और कल्याणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के भवन इस कदर खस्ताहाल थे कि उन्हें पूरी तरह कंडम (डिसमेंटल) घोषित करना पड़ा है.
राहत की बात यह है कि छाणी और कोल्यारी में पुराने भवनों को गिराकर नया अस्पताल बनाने के लिए 2 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है और काम भी शुरू हो गया है. वहीं कल्याणपुर पीएचसी का भी नया भवन बनाया जाएगा. इसके अलावा सीएमएचओ द्वितीय के अंतर्गत आने वाले घासा पीएचसी को भी डिसमेंटल करने की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि गोगुंदा में 42 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले नए उप जिला चिकित्सालय के लिए 9 बीघा जमीन आवंटित कर दी गई है.
अधिकारियों ने दिए सर्वे और रिपोर्ट के निर्देश
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है. सीएमएचओ-प्रथम डॉ. अशोक आदित्य ने कहा कि सभी अस्पतालों का सर्वे करवाकर जर्जर स्थिति को सुधारने का काम शुरू कर दिया गया है. वहीं, सीएमएचओ-द्वितीय डॉ. ओपी रायपुरिया ने सभी बीसीएमओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि उनके क्षेत्र में कोई भी अन्य भवन जर्जर हालत में है, तो उसकी सूचना तुरंत मुख्यालय भेजें ताकि समय रहते दुर्घटनाओं को रोका जा सके.

