बांसवाड़ा, डूंगरपुर सहित वागड़ और टीएसपी क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. ‘शौर्य फाउंडेशन’ नामक संस्था ने संभाग के करीब 7 जिलों में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस चलाने और सर्वे करने के नाम पर सैकड़ों युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया था.
परमानेंट करने के नाम पर वसूले 1 से 1.5 लाख रुपए
पीड़ित युवाओं ने बताया कि सितंबर 2024 में शौर्य फाउंडेशन ने एक विज्ञप्ति जारी की थी. शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए युवाओं से जीपीएस फोटो के आधार पर सर्वे करवाया गया और कुछ अभ्यर्थियों को 7,000 से 7,500 रुपए मानदेय भी दिया गया. इसके बाद संस्था के पदाधिकारियों ने झांसा दिया कि यह प्रोजेक्ट आगे चलकर सरकारी या परमानेंट हो जाएगा .नौकरी पक्की करने के नाम पर प्रत्येक कैंडिडेट से ₹1,00,000 से लेकर ₹1,50,000 तक ऐंठ लिए गए. अकेले तलवाड़ा ब्लॉक से ही करीब 22 से 24 युवाओं को निशाना बनाया गया.
दफ्तर पर ताला लटकाकर भागे ठग
कुछ महीनों तक बच्चों को पढ़वाने और छुट्टियां घोषित करने के बाद जब युवाओं को सैलरी नहीं मिली और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो संस्था के लोग सागवाड़ा स्थित अपना दफ्तर बंद कर फरार हो गए. पीड़ितों का आरोप है कि राजनीतिक रसूख के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. परेशान होकर अभ्यर्थियों ने डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिला कलेक्ट्री पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई. अनुमान है कि संभाग भर में करीब 550 युवा इस ठगी का शिकार हुए हैं.
पुलिस का बयान: बैंक खातों की जांच शुरू, अनुसंधान जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मनीष चारण ने बताया कि संस्था का टारगेट करीब 550 कैंडिडेट्स का था. अब तक पुलिस के पास 28 लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं और 70-80 अन्य लोग बयान देने पहुंचे हैं. पुलिस ने संस्था के बैंक ट्रांजैक्शंस और खातों की जांच शुरू कर दी है. पूरे संभाग से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं और मामले में गहन अनुसंधान जारी है. वहीं, गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है.

