बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. यहां सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) के बाद पिछले 4 दिनों के भीतर 4 प्रसूताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. इस हृदयविदारक घटना से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है, वहीं अस्पताल प्रशासन पर मामले को दबाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
हंसती-खेलती प्रसूता की सुबह अचानक मौत, परिजनों के संगीन आरोप
अरथूना क्षेत्र के कानेला निवासी विजय खांट की 25 वर्षीय उच्च शिक्षित पत्नी लीला की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. परिजनों के अनुसार, सिजेरियन डिलीवरी के बाद लीला पूरी तरह स्वस्थ थी और रात तक परिजनों से हंसकर बात कर रही थी. लेकिन सुबह अचानक डॉक्टरों ने बीपी लो होने की बात कहकर उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया और कुछ ही देर में मृत घोषित कर दिया.
मृतका के जेठ संजय खांट ने आरोप लगाया कि लीला का हीमोग्लोबिन 12 पॉइंट (सामान्य) होने के बावजूद डॉक्टरों ने 4 बोतल खून मंगवाया, लेकिन उसे चढ़ाया ही नहीं. इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिसिया कार्रवाई का डर दिखाकर अस्पताल प्रशासन ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव परिजनों को सौंप दिया, ताकि सच सामने न आ सके.
कलेक्टर ने माना— 4 दिन में हुईं 4 मौतें, जांच कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने पुष्टि की है कि 7 से 10 तारीख के बीच कुल 4 प्रसूताओं की मौत हुई है. इनमें से दो को गंभीर हालत में रेफर किया गया था, जबकि दो का यहीं ऑपरेशन हुआ था. लगातार हुई इन मौतों से अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में संक्रमण या दवाइयों के रिएक्शन (Drug Reaction) की आशंका गहरा गई है.
कलेक्टर ने बताया कि मौतों के सटीक कारणों की जांच के लिए 5 वरिष्ठ डॉक्टरों की एक उच्च स्तरीय विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है. साथ ही जयपुर से भी सीनियर डॉक्टर जांच के लिए आ रहे हैं. कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि परिजनों को लगता है कि उन्हें गुमराह किया गया है, तो वे अब भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं; दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.

