बांसवाड़ा जिले के ठीकरीया गांव के किसानों के सामने राजस्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही के कारण बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पटवारी और गिरदावर द्वारा राजस्व रिकॉर्ड में सिंचित कृषि भूमि को अचानक ‘असिंचित’ दर्ज कर देने से मंडी में किसानों का गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है. अपनी उपज बेचने के लिए भटक रहे आक्रोशित किसानों ने सोमवार को जिला कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है.
2025 में बिका था गेहूं, अब अधिकारी बता रहे असिंचित
ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि पिछले वर्ष 2025 में उन्होंने इसी जमीन से उपजा गेहूं मंडी में बिना किसी रुकावट के बेचा था, क्योंकि तब रिकॉर्ड में जमीन सिंचित दर्ज थी. इस साल भी किसानों ने समय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन किए. लेकिन जब किसान अपनी खून-पसीने की कमाई (गेहूं) लेकर मंडी पहुंचे, तो अधिकारियों ने ‘जमाबंदी’ और ‘खसरा नकल’ में जमीन को असिंचित बताते हुए गेहूं की तुलाई करने से साफ इनकार कर दिया.
खेतों में खरबूजे की फसल, फिर भी कागजों में सूखा
किसान अमरेंग पटेल ने विभाग की पोल खोलते हुए बताया कि वर्तमान में उनके खेतों में खरबूजे की फसल लहलहा रही है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जमीन पूरी तरह सिंचित है. बिना सिंचाई के खरबूजे जैसी फसल संभव नहीं है. आरोप है कि पटवारी और गिरदावर ने मौके पर आकर स्थिति देखी और अपनी गलती भी स्वीकार की, लेकिन अब रिकॉर्ड में सुधार करने के नाम पर आनाकानी की जा रही है.
किसानों की मांग: समाधान नहीं हुआ तो देंगे धरना
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को चेतावनी दी है कि पटवारी द्वारा की गई इस ‘लिपिकीय त्रुटि’ के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. किसानों ने प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी हैं:
- राजस्व अधिकारी तुरंत मौके का भौतिक सत्यापन करें.
- असिंचित दर्ज जमीन को तत्काल सिंचित श्रेणी में अपडेट किया जाए.
- मंडी में किसानों के गेहूं की तुलाई जल्द से जल्द शुरू हो.
किसानों ने दो टूक कहा है कि यदि समय रहते रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.

