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बांसवाड़ा: शिक्षकों का अनोखा विरोध; सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए किया यज्ञ और हनुमान चालीसा का पाठ

राजस्थान में ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती और तबादलों पर लगी लंबी रोक से शिक्षकों का धैर्य अब जवाब दे गया है. राजस्थान शिक्षक संघ ‘सियाराम’ के बैनर तले शिक्षकों ने अपनी 71 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन के चतुर्थ चरण में शुक्रवार को बांसवाड़ा जिला प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय परिसर में एक अनूठा प्रदर्शन किया. शिक्षकों ने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ‘सद्बुद्धि’ के लिए विशेष यज्ञ आयोजित किया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा व बजरंग बाण के 1008 पाठ किए.

शिक्षा मंत्री के ‘तुगलगी आदेशों’ की दी आहुति

विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने वर्तमान शिक्षा मंत्री द्वारा जारी किए गए विभिन्न आदेशों को ‘तुगलगी’ करार देते हुए उनकी प्रतीकात्मक आहुति दी. शिक्षकों का कहना है कि सरकार लगातार शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात कर रही है. यज्ञ के माध्यम से ईश्वर से प्रार्थना की गई कि सरकार को सद्बुद्धि मिले और वे शिक्षकों की जायज मांगों पर विचार करें.

7 साल का इंतजार और काउंसलिंग में धांधली के आरोप

जिला मंत्री महिपाल भुता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षक पिछले 7 वर्षों से अपने तबादलों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएसपी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, लेकिन काउंसलिंग के दौरान विभाग पारदर्शिता नहीं बरतता और मनमर्जी से पदों को छिपाया जाता है, जो पूरी तरह विधि विरुद्ध है.

प्रमुख मांगें जिन पर गूंजा शिक्षा विभाग कार्यालय:

  • अवकाश बहाली: ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई मनमानी कटौती को तुरंत रद्द किया जाए.
  • वेतनमान विसंगति: आठवें वेतनमान में 3.86% फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग.
  • संसाधन: प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक कक्षा पर एक शिक्षक नियुक्त हो और कंप्यूटर-प्रिंटर जैसे आधुनिक संसाधन दिए जाएं.
  • भवन एवं समायोजन: जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत हो और कुक-कम-हेल्परों सहित संविदा कर्मियों को नियमित पदों पर समायोजित किया जाए.

यज्ञाचार्य जिलाध्यक्ष नवीन जोशी के नेतृत्व में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान परिसर में अचानक बंदरों का झुंड पहुंच गया. शिक्षकों ने इसे शुभ संकेत और बजरंगबली का आशीर्वाद माना. शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बंदरों को गुड़ और चने का भोग लगाया.

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