राजस्थान के डूंगरपुर जिले में जनकल्याणकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की पोल खोलता एक मामला सामने आया है. साबला पंचायत समिति के वालाई ग्राम पंचायत की एक महिला ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है. प्रार्थिया का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद न तो उसे सिर छिपाने के लिए छत मिल रही है और न ही पेट भरने के लिए मनरेगा में काम.
कभी भी गिर सकता है जर्जर आशियाना

साकर खाईया निवासी धुली यादव (पत्नी नारायण यादव) ने जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वह वर्तमान में एक जर्जर केलुपोश (मिट्टी-खपरैल) के मकान में रह रही है. मकान की हालत इतनी खराब है कि वह कभी भी जमींदोज हो सकता है. बारिश और आंधी के दिनों में परिवार को हर वक्त जान-माल की हानि का डर सताता रहता है. धुली यादव के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मकान स्वीकृत कराने के लिए ग्राम पंचायत वालाई में अब तक चार बार आवेदन किया है, लेकिन हर बार उनका नाम सूची से बाहर कर दिया जाता है.
सरपंच और VDO पर सुनवाई न करने का आरोप
प्रार्थिया ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ज्ञापन में बताया गया कि आवास की मांग को लेकर उन्होंने कई बार स्थानीय सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के चक्कर काटे, लेकिन वहां से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. आरोप है कि जरूरतमंद होने के बावजूद प्रशासनिक अनदेखी के कारण उन्हें योजना के लाभ से वंचित रखा जा रहा है.
जॉब कार्ड बना, पर मनरेगा में रोजगार नदारद
आवास के साथ-साथ धुली यादव के सामने रोजी-रोटी का भी गहरा संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने बताया कि उनके पास मनरेगा जॉब कार्ड उपलब्ध है, लेकिन पंचायत द्वारा उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है. आर्थिक तंगी के चलते परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है.
जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रार्थिया ने मांग की है कि उनके जर्जर मकान का भौतिक सत्यापन करवाया जाए और जल्द से जल्द आवास स्वीकृत कर मनरेगा में रोजगार उपलब्ध कराया जाए. अब देखना यह है कि प्रशासन इस गरीब परिवार की सुध कब तक लेता है.

