राजस्थान के डूंगरपुर जिले में वन्यजीव संरक्षण और वन क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी को लेकर वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है. लंबे समय से संसाधनों की कमी से जूझ रहे वनकर्मियों को अब विभाग द्वारा अत्याधुनिक उपकरणों और वाहनों से सशक्त किया जा रहा है. केम्पा (CAMPA) स्कीम के तहत जिले की सभी 6 रेंजों के लिए विशेष वन्यजीव रेस्क्यू किट और गश्त के लिए 11 नई बाइक्स उपलब्ध कराई गई हैं.
रेस्क्यू ऑपरेशन में आएगी तेजी
डूंगरपुर जिला अपनी पथरीली भौगोलिक स्थिति और घने वन क्षेत्रों के लिए जाना जाता है. अक्सर आबादी क्षेत्रों में पैंथर, जरख (Hyena) और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों के आने की खबरें आती रहती हैं. पहले संसाधनों के अभाव में वनकर्मियों को रेस्क्यू करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी और जोखिम भी अधिक रहता था.
डूंगरपुर वन विभाग के एसीएफ (ACF) गौतम मीणा ने बताया कि विभाग को प्राप्त रेस्क्यू किट का वितरण सभी 6 रेंजों में कर दिया गया है. इस आधुनिक किट में मगरमच्छों को सुरक्षित पकड़ने के लिए मजबूत जाल, पैंथर के लिए विशेष पिंजरे और घायल वन्यजीवों के प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी उपकरण शामिल हैं. इन संसाधनों से न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि वन्यजीवों को भी बिना चोट पहुंचाए रेस्क्यू किया जा सकेगा.
11 नई बाइक्स से बढ़ेगी गश्त की रफ्तार

वन क्षेत्रों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए विभाग के बेड़े में 11 नई बाइक्स शामिल की गई हैं. एसीएफ मीणा ने बताया कि घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर जहां चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाते थे, वहां अब वनकर्मी इन बाइक्स के जरिए आसानी से पहुंच सकेंगे.
इन बाइक्स के आने से होंगे ये मुख्य लाभ:
- अवैध गतिविधियों पर रोक: जंगल में होने वाली लकड़ी की अवैध कटाई और शिकार जैसी घटनाओं पर त्वरित अंकुश लगाया जा सकेगा.
- अग्नि सुरक्षा: गर्मी के मौसम में वनों में लगने वाली आग (वनाग्नि) की सूचना मिलते ही कर्मचारी कम समय में मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर पाएंगे.
- त्वरित रिस्पॉन्स: दुर्गम क्षेत्रों में गश्त बढ़ने से वन संपदा की सुरक्षा और बेहतर होगी.
जल्द शुरू होगी बाइक्स की सेवा
एसीएफ गौतम मीणा के अनुसार, वन्यजीव रेस्क्यू किट का वितरण तो कर दिया गया है, वहीं नई बाइक्स का रजिस्ट्रेशन कार्य प्रक्रियाधीन है. जैसे ही रजिस्ट्रेशन और कागजी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी, ये सभी बाइक्स संबंधित रेंजों को सौंप दी जाएंगी. विभाग के इस प्रयास से न केवल वनकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि डूंगरपुर जिले की प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों का संरक्षण भी और अधिक प्रभावी होगा.

