डूंगरपुर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन की तैयारियों के बीच डूंगरपुर जिले में योग प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया. अखिल राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के बैनर तले जुटे इन प्रशिक्षकों ने राज्य सरकार से अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति पर संज्ञान लेने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
अल्प मानदेय से भरण-पोषण का संकट
प्रदर्शन के दौरान योग प्रशिक्षकों ने बताया कि जुलाई 2021 से राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उनकी नियुक्ति की गई थी. उस समय से महिला योग प्रशिक्षकों को मात्र 5,000 रुपये और पुरुष प्रशिक्षकों को 8,000 रुपये का बेहद अल्प मानदेय दिया जा रहा है. प्रशिक्षकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि आज के दौर की कमरतोड़ महंगाई में यह राशि केवल आने-जाने के किराए में ही खर्च हो जाती है. इस अल्प वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना नामुमकिन हो गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
सरकार से ये हैं प्रमुख मांगें
योग प्रशिक्षकों का कहना है कि वे औषधालयों, पंचायतों और विद्यालयों के माध्यम से लोगों को निरोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है. अपनी मांगों के समर्थन में उन्होंने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं:
- संविदा कैडर में शामिल करें: योग प्रशिक्षकों को संविदा कैडर-2022 के दायरे में लिया जाए, ताकि उन्हें नियमित लाभ मिल सकें.
- स्थायी नीति का निर्माण: योग के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कोई ठोस और स्थायी नीति बनाए.
- पूर्णकालिक रोजगार: प्रशिक्षकों को पूर्णकालिक नियुक्त कर उनके वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए.
- सम्मान: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेश के योग प्रशिक्षकों को उनके निस्वार्थ योगदान के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए.
योग प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करने पर मजबूर होंगे.

